सोमवार, 11 जनवरी 2010

इस सप्‍ताह में ही भूकम्‍प के कई झटकों के आने की उम्‍मीद है !!

'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिषीय अनुसंधान केन्‍द्र' के द्वारा ग्रहों की गत्‍यात्‍मक और स्‍थैतिक शक्ति की खोज के बाद यह स्‍पष्‍ट हो गया है कि इस विशाल ब्रह्मांड में हर घटना एक दूसरे पर आधारित है और विभिन्‍न प्रकार की किरणों या गुरूत्‍वाकर्षण शक्ति के प्रभाव से इनमें से कोई भी अछूता नहीं। जिस तरह हर पशु और पक्षियों में अपने जीन के हिसाब से उसके क्रियाकलाप देखने को मिलते हैं , उसी प्रकार हर व्‍यक्ति अपने जन्‍मकालीन ग्रहों के हिसाब से अपनी शक्ति प्राप्‍त करता है और अपने अपने कर्तब्‍यों का पालन करता है। हां, युग , समाज और काल के हिसाब से व्‍यक्ति विशेष में थोडा बहुत परिवर्तन देखने को मिलता है , उसे हम पृथ्‍वी के अलग अलग भाग का प्रभाव या इसमें होनेवाले परिवर्तन का प्रभाव मान सकते हैं।

व्‍यक्ति विशेष पर ग्रहों के प्रभाव का विशद अध्‍ययन के बाद हमने पृथ्‍वी की जलवायु पर ग्रहों के प्रभाव को समझना चाहा , तो इन दोनो में दिखाई देनेवाला सहसंबंध हमें इसके अध्‍ययन के शौक को बढाता रहा। इस दिशा में हमारी खोज के आधार पर 2010 के पूरे वर्षभर के मौसम पर लिखा गया एक आलेख आप कुछ ही दिनों में आपको मिल जाएगी। मैं यह नहीं कह सकती कि जलवायु को प्रभावित करने सारे ग्रहीय कारकों की हमें जानकारी हो चुकी है , 40 प्रतिशत की ही जानकारी हमें हो सकती है , 60 प्रतिशत तक की खोज बाकी हो सकती है। पर खास तिथि को खास ग्रहीय स्थिति को देखते हुए जलवायु की कोई भविष्‍यवाणी का सटीक हो जाना इस संबंध को मान्‍यता दिलाने के लिए काफी है, जो कि पिछले वर्ष कई बार हो चुका। जलवायु पर ग्रहों के प्रभाव को देखने के बादए भूकम्‍प जैसी घटनाओं पर भी ग्रहों के प्रभाव को जानने की उत्‍सुकता होनी स्‍वाभाविक है। इधर एक दो वर्षों से इस दिशा में अध्‍ययन किया गया तो कुछ सफलता मिलने लगी ।

इस आलेख मे लिखे गए खास ग्रह स्थिति में बाली में हुए भूकम्‍प की घटना तथाइस आलेख में लिखे गए ग्रहयोग के अनुसार हुई भूकम्‍प की घटना हमारे अध्‍ययन के पश्‍चात निकाले गए निष्‍कर्ष को सत्‍य साबित करते हुए और अध्‍ययन के लिए हमारे आत्‍मविश्‍वास को बढाने में मदद कर रही है। यही कारण है कि सामने भूकम्‍प के लिए जिम्‍मेदार एक खास ग्रह स्थिति की चर्चा करने से मैं अपने आपको नहीं रोक सकी। आनेवाले 13 से 16 जनवरी 2010 के मध्‍य आसमान के विभिन्‍न राशियों में स्थित ग्रहों की गत्‍यात्‍मक और स्‍थैतिक शक्ति पृथ्‍वी के विभिन्‍न क्षेत्रों में भूकम्‍प के कई झटके देने में समर्थ होगी।

इन चार दिनों में जो शुरूआती झटका अधिक बडे रूप में हो सकता है , वह किसी भी देश में 13 जनवरी को 5 बजे से 7 बजे सुबह आ सकता है। हमारे अध्‍ययन के अनुसार ग्रहों के आधार पर इस झटके की तीव्रता 180 डिग्री देशांतर रेखा पर दिखाई दे रही है। यानि उसके आसपास 20 डिग्री के अंतर पर इस झटके को महसूस किया जाना चाहिए। वह रेखा अंतर्राष्‍ट्रीय तिथि परिवर्तन की रेखा भी है , इसलिए भूकम्‍प आने की तिथि के लिए हम 12 जनवरी या 13 जनवरी में से दोनों को ले सकते हैं, ताकि कोई संदेह न बने। पर वास्‍तव में भारतवर्ष की घडी के हिसाब से यह समय 13 जनवरी की रात 11 बजे का है। अन्‍य महत्‍वपूर्ण झटके इस मुख्‍य समय के अलावे किसी भी देश में यहां तक कि हमारे ही देश के आसपास की देशांतर रेखा के 20 डिग्री अंतर पर  10 बजे रात्रि से लेकर 12 बजे रात्रि तक का भी रह सकता है। मेरी ईश्‍वर से प्रार्थना है कि इसमें जान माल की अधिक क्षति न हो ।


भूकम्‍प जैसे दैवी आपदा के अलावे अन्‍य मानवकृत आपदाओं के होने में भी इस प्रकार के ग्रहीय योग की भूमिका होती है , क्‍यूंकि ऐसी ग्रह स्थितियां पृथ्‍वी में हलचल मचाने के अलावे किसी न किसी प्रकार की घटना को उपस्थित कर व्‍यक्ति के दिलोदिमाग में भी हलचल मचाने में मुख्‍य भूमिका अदा करती है । इसलिए ऐसे ग्रहयोग के समय अनावश्‍यक कार्यों की जबाबदेही या किसी मनोरंजक या महत्‍वपूर्ण कार्यक्रम की उपेक्षा ही की जानी चाहिए !!




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