बुधवार, 10 फ़रवरी 2010

मौसम के पूर्ण तौर पर ठीक होने के लिए 16 फरवरी का इंतजार करना पड सकता है !!











इस पोस्‍ट का आरंभ करते हुए मैं आपको 9 दिसंबर 2009 को प्रकाशित किए गए पोस्‍ट पर ले जाना चाहूंगी , जिसमें मैने लिखा था कि 3 और 4 फरवरी 2010 के ग्रहीय योग के ज्‍योतिषीय प्रभाव के फलस्‍वरूप भारतवर्ष में असामान्‍य मौसम की संभावना बनेगी , जिसमें कहीं बारिश , तो कहीं कोहरा और कहीं तेज ठंडी हवा चलने के कारण ठंड एक बार फिर से बढेगा। आप सभी इसके लिए तो तैयार रहें ही , ग्रहों के ज्‍योतिषीय प्रभाव को समझने के लिए तथा 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के इस सिद्धांत को परखने के लिए इस बात को अपनी डायरी में भी नोट कर लें। उसके बाद 22 जनवरी 2010 को लिखे गए अपने पोस्‍ट में मैने दुहराया कि 3-4 फरवरी के जिस योग के बारे में चर्चा मैने 9 दिसंबर 2009 को ही कर रखा है , अब वह बहुत निकट है और इसका प्रभाव मुझे 26 जनवरी से ही पडता दिखाई दे रहा है।

पर 26 जनवरी के बाद बर्फ गिरनेवाले जगहों पर दुनिया भर में अनोखे ढंग से हिमपात अवश्‍य हुआ , पर भारतवर्ष में ऐसा बादल या बारिश का मौसम नहीं दिखाई पडा, 26 जनवरी के बाद सूर्य की तीखी रोशनी से ठंढ की विदाई का माहौल बन गया था 26 जनवरी के बाद मौसम के प्रतिकूल न होने से मेरी भविष्‍यवाणी अवश्‍य गलत हो गयी थी , पर उसका एक छोटा सा कारण मुझे तबतक समझ में आ गया था , पर इससे 3 और 4 तारीख के ग्रहयोग काम नहीं करते , ऐसा बिल्‍कुल भी नहीं था। मेरे ज्‍योतिष के हिसाब से मुख्‍य तिथि 3 और 4 फरवरी थी , एक सप्‍ताह पहले की जगह एक सप्‍ताह बाद भी तो इसका असर बना रह सकता है , यह सोंचते हुए अपनी भविष्‍यवाणी पर अडिग रहते हुए मैंने 1 फरवरी को मैने फिर से  एक पोस्‍ट लिख ही दिया जिसमें बताया कि शुभ ग्रहों का संयोग मौसम को नम और ठंडा तथा अशुभ ग्रहों का संयोग वातावरण को गर्म और शुष्‍क बनाता है। 3 और 4 फरवरी को शुभ ग्रहों की खास स्थिति को देखते हुए ही मैने कहा था कि इस ग्रहयोग के व्‍यतीत हो जाने के बाद ही मौसम में सुधार आ सकता है। पर मेरा ध्‍यान इस बात पर थोडा भी नहीं गया कि 29 और 30 जनवरी को मंगल और चंद्र की स्थिति वातावरण को शुष्‍क बनाए रख सकती है। पर मेरी इस गल्‍ती से 3 और 4 फरवरी के शुभ ग्रहों का प्रभाव तो समाप्‍त नहीं हो सकता। आनेवाले 3 और 4 फरवरी को भारतवर्ष के अधिकांश भाग का , खासकर उत्‍तर भारत का मौसम बहुत गडबड रहेगा , इस बात पर मैं अभी भी डटी हुई हूं।

पर 3 फरवरी तक न तो मुझे किसी समाचार से और न ही सरकार के अरबों खर्च कर रहे मौसम विभाग से भारतवर्ष के किसी कोने में भी मौसम के खराब होने की सूचना मिली थी। 4 जनवरी को काफी निराश मैं अपनी गणना को बारंबार देख रही थी और उसमें कोई गल्‍ती न पाकर चिंतन कर ही रही थी कि ललित शर्मा जी की इस पोस्‍ट पर मेरी नजर पडी ,जिसमें लिखा गया था कि इनकी भविष्य वाणी अक्षरश: सच निकली. हमारे यहाँ मौसम ३ तारिख रात  से ही ख़राब है. आसमान में बादल छाये हुए हैं. तेज हवाएं चल रही है. अचानक ठण्ड बढ़ गई है. बारिश होने के हालत बने हुए हैं और आज ४फ़रवरी है. तो मुझे याद आया कि संगीता जी ने तो यह भविष्य वाणी सोमवार, १ फरवरी २०१० को कर दी थी. 

किसी विज्ञान पर इतने वर्ष अपना समय देना एक बार फिर से सार्थक हो गया था। 








बाद में गूगल सर्च राजस्‍थान , छत्‍तीसगढ और मध्‍य प्रदेश के कई स्‍थानों पर आंधी और बारिश की सूचना दे चुका था। उसके बाद प्रतिदिन बादल बढते हुए पंजाब , हरियाणा , उत्‍तराखंड , उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली तक को बारिश में भिगोने के बाद झारखंड भी पहुंच चुका है। विश्‍वभर से असामान्‍य ढंग के हिमपात की सूचना भी मिल रही है , जो इसी ग्रहयोग का प्रभाव मानी जा सकती है। कल यानि 11 फरवरी को इस ग्रहयोग का प्रभाव समाप्‍त हो जाना चाहिए , पर मैं इतनी जल्‍द मौसम में बहुत सुधार नहीं देख रही हूं। इसका कारण दो छोटे छोटे शुभ ग्रहयोग हैं। ये 15 फरवरी तक मौसम के मिजाज को गडबड बनाए रखने में सक्षम हैं , इसलिए हमें मौसम के ठीक होने के लिए 16 फरवरी तक का इंतजार करना पड सकता है।


























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