बुधवार, 3 फ़रवरी 2010

आज का दिन शेयर बाजार के लिए सर्वाधिक बुरा रह सकता है !!

अगस्‍त 2007 के बाद शेयर बाजार पर ग्रहों के पडने वाले प्रभाव के विश्‍लेषण के बाद अपने अनुभवों के आधार पर नवम्‍बर 2008 के बाद से ही मैं ग्रहों की सप्‍ताह भर की स्थिति को देखते हुए शेयर बाजार की साप्‍ताहिक स्थिति का आकलन करते हुए  मोल तोल के लिए साप्‍ताहिक कॉलम लिखती आ रही हूं। इस आकलन में कितने प्रतिशत की सत्‍यता रहती है , ये तो मेरे नियमित पाठक ही बता सकते हैं , पर यह बात अवश्‍य है कि अत्‍यधिक काम की भीड के कारण होनेवाले समयाभाव में कभी कभार कॉलम लिखना बंद भी हो जाता है। जनवरी 2010 में भी पहले सप्‍ताह आलेख लिखने के बाद अभी तक यह बंद ही रहा है।

27 दिसंबर 2009 को मोल तोल में प्रकाशित किए गए आलेख में मैने लिखा था .......
इस प्रकार वर्ष 2009 आर्थिक मामलों में एक यादगार वर्ष बन गया है। मंदी का भय भी वर्ष के समाप्‍त होते होते खत्‍म हुआ। नौकरियों में फिर से रौनक आ गई है। यहां तक कि अप्रैल में किसी तिथि को कुछ अस्‍थाई ग्रहीय योगों को देखकर मैं थोडी सशंकित भी रही, उनमें से भी बहुत जगह मुझे निराश नहीं होना पडा और दिसंबर तक मैने कहीं भी ग्रहों को कमजोर देखते हुए शेयर बाजार के बारे में बडी निराशाजनक भविष्‍यवाणी नहीं की थी। और उसी के अनुरूप पूरे वर्ष तेजी का बाजार निवेशकों को काफी लुभाता रहा है। अभी भी बाजार में जितने संकेत दिख रहे हैं, उनमें सकारात्मक बातें ही ज्यादा हैं। यहां तक कि तकनीकी रूप से छोटी अवधि के लिए ज्यादातर संकेतक मौजूदा तेजी कायम रहने का इशारा कर रहे हैं, लेकिन मुझे जनवरी 2010 में ऐसा नहीं दिखाई दे रहा। जनवरी 2010 में बाजार की स्थिति थोडी अनिश्चितता की बनेगी और इसकी शुरूआत अगले सप्‍ताह से ही आरंभ हो सकती है।


फिर उसके बाद मोल तोल के लिए आलेख लिखने का मुझे मौका न मिल सका। पर जनवरी के अंत तक की बात क्‍या करूं , कल 2 फरवरी के शेयर बाजार की भी 27 दिसंबर 2009 की शेयर बाजार की स्थिति से तुलना की जाए , तो उसकी स्थिति सचमुच ही बहुत ही कमजोर दिखाई पड रही है। इस दृष्टि से आज यानि 3 फरवरी का दिन शेयर बाजार के लिए सर्वाधिक कमजोर दिखता है। इसलिए सेंसेक्‍स और निफ्टी में आज सबसे बडी गिरावट की संभावना दिखती है। 4 फरवरी को भी बाजार सामान्‍य तौर पर कुछ कमजोर भी रह सकता है , पर उसके बाद तेजी की संभावना बनेगी, क्‍यूंकि आनेवाले समय में ग्रहों के आधार पर शेयर बाजार में बडे स्‍तर की गडबडी नहीं दिखती है। इसलिए निवेशकों को अधिक घबडाने की आवश्‍यकता नहीं है।




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