शनिवार, 24 अप्रैल 2010

2010 में किन तिथियों को प्राकृतिक या मानवकृत दुर्घटनाओं या अन्‍य आपदाओं की संभावनाएं बनेंगी ??

काफी अर्से से पृथ्‍वी पर आनेवाले भूकम्‍प , तूफान , ज्‍वालामुखी तथा  अन्‍य प्राकृतिक आपदाओं के वक्‍त आसमान में ग्रहों की स्थिति का अध्‍ययन करने के बाद कुछ खुलासे तो हुए , पर पृथ्‍वी पर आक्षांस और देशांतर रेखा के निर्धारण में अभी भी कठिनाई आ ही रही है , जिसके कारण उपयुक्‍त भविष्‍यवाणी करने में बाधा उपस्थित हो रही है। 2012 में आनेवाले प्रलय के बारे में हुए शोर शराबे के बाद प्राकृतिक आपदाओं के बारे में अधिक सूक्ष्‍मता से अध्‍ययन किया गया , इससे भी पृथ्‍वी पर प्राकृतिक आपदा वाले तिथियों के बारे में कुछ संकेत अवश्‍य मिले , लेकिन स्‍थान पर अभी भी निश्चितता न हो पाने से पूर्ण तौर पर रहस्‍य को उजागर कर पाना मुश्किल लग रहा है। हालांकि डेटाओं की कमी और ज्‍योतिष के क्षेत्र में अन्‍य विज्ञानों के सहयोग न मिल पाना भी इसकी एक मुख्‍य वजह है।


15 अप्रैल को लिखे आलेख में मैने बताया था कि पश्चिम बंगाल, बिहार और असम में मंगलवार को आए चक्रवाती तूफान ने भारी तबाही मचायी है , यह मौसम को प्रभावित करने वाला ग्रहयोग नहीं है , यह तो प्राकृतिक आपदा लानेवाले योग के कारण हुआ है , जिसकी चर्चा मैं अपनी व्‍यस्‍तता के कारण न कर सकी थी। जहां मौसम के परिवर्तन के लिए जबाबदेह बारिश के योग के लिए शुभ ग्रहों की विशेष स्थिति को देखा जाता है , वहीं बडे स्‍तर पर आनेवाले तूफान , भूकम्‍प या अन्‍य प्राकृतिक आपदाओं के कारण ग्रहों की अति क्रियाशील स्थिति के साथ ही साथ विशेष प्रकार के योग होते है। यहां तक कि मानवीय गल्‍ती या दुष्‍टता के फलस्‍वरूप हुई कई प्रकार की घटनाओं में भी इन ग्रहयोगों की भूमिका होती है। 

प्रवीण शाह जी ने भी अपने एक आलेख में लिखा है कि मेरी 12 जनवरी की मेरी भूकम्‍प वाली भविष्‍यवाणी के सही होने के बाद दुनियाभर में अभी तक 32 भूकम्‍प आ चुके हैं , जिनमें कुछ में जान माल का भी नुकसान हुआ है। ये भूकम्‍प भी वैसे ही योगों में आया करता है , पर हर समय चर्चा कर पाना संभव नहीं है। पर खगोलशास्‍त्री और भूगर्भशास्‍त्री के साथ साथ ही फलित ज्‍येतिष के जानकार मिलकर रिसर्च करें कि उस खास ग्रहयोग का प्रभाव के किस क्षेत्र में बनने की उम्‍मीद है , तो शायद समस्‍या का समाधान जल्‍द निकल आए। 2010 के आनेवाले पूरे वर्षभर में पृथ्‍वी पर इस प्रकार की बुरी ग्रह स्थिति निम्‍न तिथियों को बनती है , जिसके कारण कई प्रकार के प्राकृतिक या मानवकृत दुर्घटनाओं या अन्‍य आपदाओं की संभावनाएं बनेंगी,.........

मई में 3 , 7, 9 , 12 , 14 ,21 , 23 , 29 , 30
जून में 3 , 6 , 12 , 17 , 19
जुलाई में 3 , 11 , 14 ,  23 , 31 
अगस्‍त में 4 , 10 , 11 , 12 , 13 , 21 , 23 , 26 , 27
सितम्‍बर में 7 , 8 , 11 , 19 , 23 , 24
अक्‍तूबर में 4 , 7 , 8 , 20 , 21 
नवम्‍बर में 5 , 6 , 7 , 16 , 17 , 19 , 20 , 28
दिसंबर में 2 , 5 , 7 , 10 , 14 , 15 , 19 , 29 , 30 , 31

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