गुरुवार, 17 जून 2010

जन जन तक ज्‍योतिष के ज्ञान को पहुंचाने का प्रयास - 5

ज्‍योतिष आम लोगों के लिए बिल्‍कुल नया विषय है और हममें से सभी लोगों के दिमाग में यह बात पहले से है कि यह बहुत ही जटिल विषय है , इसलिए ज्‍योतिष सीखा ही नहीं जा सकता। लेकिन बात ऐसी नहीं है , ज्‍योतिष के सारे नियम जटिल क्‍यूं कर होंगे , अब हमें जिस विषय का विशेषज्ञ बनना होता है , उसी में विशिष्‍टता हासिल करते हैं , पर बाकी विषयों की भी सामान्‍य जानकारी तो रखते ही हैं। ज्‍योतिष में भी सामान्‍य जानकारी रखना बहुत कठिन नहीं है , सिर्फ अपनी जिज्ञासाओं को हमारे सामने अवश्‍य रखें और इस ज्ञान को प्राप्‍त करने में आगे बढते जाएं। जैसा कि मैं पुराने लेखों में भी लिख चुकी हूं कि पृथ्‍वी की पश्चिम से पूर्व की ओर अपने अक्ष पर घूमने के कारण ही आसमान की एक चौडी पट्टी पूरब से पश्चिम की ओर जाती दिखती है और उसी पट्टी के 360 डिग्री के 12 भाग कर 12 राशियां निकाले गए हैं । इसी चौडी पट्टी में सभी ग्रह कभी थोडा उत्‍तर और कभी थोडा दक्षिण होते हुए उदित होते हैं और आगे बढते हुए अस्‍त भी हो जाते हैं। बालक के जन्‍म के समय इसी पट्टी में स्थित ग्रहों को उसी अनुसार रखते हुए उसकी जन्‍मकुंडली बनायी जाती है , जिसके बारे में मैने पुराने लेख में लिखा था।

एक सूर्य को ही लें , पृथ्‍वी की घूर्णन गति के कारण सूर्य 24 घंटे में पृथ्‍वी का पूरा चक्‍कर लगाता दिखता है। जन्‍मकुंडली में सूर्य की स्थिति को देखते हुए आप आकलन कर सकते हैं कि उक्‍त बच्‍चे का जन्‍म किस वक्‍त हुआ है । पिछले दिन दिए गए चार्ट में सूर्य लग्‍नराशि वाले खाने में था , जो पूरब की दिशा का द्योतक होता है। इसका अर्थ यह है कि बालक के जन्‍म के समय सूर्य पूरब दिशा में था , पूरब दिशा में सूर्य सवेरे होता है , इसलिए बालक का जन्‍म सवरे यानि सूर्योदय के आसपास हुआ है। अब कुंडली में यहां से सूर्य जैसे जैसे एक एक खाने सरकता जाएगा , जातक का जन्‍म समय में सूर्योदय से दो दो घंटे का अंतर होता जाएगा । मध्‍य आकाश वाली राशि पर सूर्य के होने का अर्थ है कि जातक का जन्‍म दोपहर के आसपास हुआ है। पुन: कुंडली में उससे आगे एक एक राशि में सूर्य के बढने का अर्थ है कि बालक का जन्‍म दोपहर के दो घंटे बाद या चार घंटे बाद हुआ है। इसी प्रकार पश्चिमी क्षितिज की राशि में सूर्य के होने का अर्थ है कि बालक का जन्‍म सूर्यास्‍त का है , जबकि विपरीत दिशा के आकाश की ओर सूर्य के होने का अर्थ है कि बालक का जन्‍म मध्‍य रात्रि का है।

इस चित्र के माध्‍यम से अच्‍छी तरह समझाया गया है कि जन्‍मकुंडली में सूर्य की स्थिति को देखकर आकलन किया जा सके कि उसका जन्‍म किस वक्‍त हुआ था।  ज्‍योतिषी भले ही पंचांगों को देखकर जन्‍मकुंडली बना लेते हो , यह सामान्‍य जानकारी उनमें से भी बहुतों को नहीं मालूम होती है। आनेवाले समय में किसी कुंडली के चक्र को देखकर ही आप बता सकते हैं कि जिसकी कुंडली है , उसका जन्‍म किस बेला में हुआ था। है न आम व्‍यक्ति के लिए बहुत रोचक जानकारी ??
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