रविवार, 27 जून 2010

इस वर्ष किसानों को अवश्‍य राहत मिलनी चाहिए !!

दो चार दिन पूर्व अंतर सोहिल जी की टिपपणी मिली थी , उन्‍होने पूछा था कि इस गर्मी से कब निजात मिलेगी। ज्‍योतिष सीखलाने का क्रम शुरू कर दिया था , इस कारण कोई नया पोस्‍ट नहीं लिख पा रही थी , इसलिए जबाब न दे सकी। इस वर्ष के मौसम का आकलन करते हुए मैने 29 मार्च को ही जो लेख लिखा था , उसमें बरसात तक की चर्चा थी। 6 और 7 अप्रैल के ग्रहीय योग के काम न करने से उस सप्‍ताह मात्र के मौसम में ठंडक आने की भविष्‍यवाणी के गलत होने को जितना हाईलाइट किया गया , उतना बाद में सही हो रही भविष्‍यवाणी को हाईलाइट किया जाता , तो मैं वैसे निंदक को नियरे रखना अवश्‍य पसंद करती। प्राकृतिक असंतुलन के कारण बारिश कम हो रही है , या असंतुलित ढंग से हो रही है , यह हकीकत है। पंद्रह वर्ष पूर्व बोकारो मे गर्मी के दिनों में शाम में लगभग प्रतिदिन बारिश होती थी , और आज चार महीने की गर्मी बीतने को है , अबतक दो चार दिन पानी के छींटे ही पडे होंगे। उस लेख में मैने उस सप्‍ताह के बाद के बारे में ये भविष्‍यवाणियां की थी .....

29 अप्रैल के आसपास उत्‍तर भारत के अधिकांश भागों में गर्मी अपनी चरम सीमा पर रहेगी। उसके बाद क्रमश: कुछ सुधार होते हुए 12 मई के बाद स्थिति थोडे नियंत्रण में आ सकती है, क्‍यूंकि 18 मई के आसपास का समय पुन: हल्‍की फुल्‍की बारिश लानेवाला होगा , जो आमजनों को थोडी राहत दे सकता है। उसके बाद मई का बाकी समय भी सामान्‍य गर्मी का ही होगा। 24 जून तक लगातार बढते हुए क्रम में नहीं , वरन् कमोबेश होती हुई गर्मी बनी रहनी चाहिए , पर उसके तुरंत बाद शुभ ग्रहों का प्रभाव आरंभ होगा , जिसके कारण बादल बनने और बारिश होने की शुरूआत हो सकती है , यदि नहीं तो कम से कम मौसम खुशनुमा बना रह सकता है। 


23 अप्रैल को पोस्‍ट किए गए अपने आलेख की टिप्‍पणी में डॉ मनोज मिश्र जी की टिप्‍पणी का जबाब देते हुए मैने फिर से इस बात को दुहराया ....


डॉ मनोज मिश्र जी,
मैने तो मौसम की चर्चा करते हुए 
पुराने आलेख में लिखा है ही कि लगभग 18 अप्रैल तक मौसम कुछ सामान्‍य बना रह सकता है , पर उसके बाद पुन: तेज गर्मी से लोगों का जीना दूभर हो सकता है। 29 अप्रैल के आसपास उत्‍तर भारत के अधिकांश भागों में गर्मी अपनी चरम सीमा पर रहेगी। उसके बाद क्रमश: कुछ सुधार होते हुए 12 मई के बाद स्थिति थोडे नियंत्रण में आ सकती है, क्‍यूंकि 18 मई के आसपास का समय पुन: हल्‍की फुल्‍की बारिश लानेवाला होगा , जो आमजनों को थोडी राहत दे सकता है। उसके बाद मई का बाकी समय भी सामान्‍य गर्मी का ही होगा। 24 जून तक लगातार बढते हुए क्रम में नहीं , वरन् कमोबेश होती हुई गर्मी बनी रहनी चाहिए , पर उसके तुरंत बाद शुभ ग्रहों का प्रभाव आरंभ होगा , जिसके कारण बादल बनने और बारिश होने की शुरूआत हो सकती है , यदि नहीं तो कम से कम मौसम खुशनुमा बना रह सकता है। इस वर्ष यानि 2010 में मौसम की सबसे अधिक बारिश 4 अगस्‍त के आसपास से शुरू होकर 19 सितम्‍बर के आसपास तक होगी। यह समय पूर्ण तौर पर खेती का है , इसलिए इस वर्ष किसानों को अवश्‍य राहत मिलनी चाहिए।





आप पाठकों ने भी गौर किया होगा कि फरवरी और मार्च के महीने में लगातार जितना प्रचंड गर्मी पडी , एक दिन भी बादल और बरसात देखने को नहीं मिला , उसकी तुलना में ठीक 29 अप्रैल से ही परिवर्तन दिखाई दिया , 29 अप्रैल को बहुत स्‍थानों में बारिश हुई थी। अप्रैल और मई में कभी कभी यत्र तत्र बादल और बारिश के बनते रहने से अवश्‍य राहत रही। अब 24 जून के बाद गर्मी कम होगी , बादल बनेंगे , बारिश की शुरूआत होगी , ये सब मैने 29 मार्च को ही लिख दिया था , और तीन चार दिनों से आप मौसम का रूख देख ही रहे होंगे। हां , ग्रहों के प्रभाव को पूर्ण तौर पर प्राप्‍त करने के लिए प्राकृतिक असंतुलन को तो कम करना ही होगा। आशा है , कम कहे को अधिक समझेंगे !!
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