शुक्रवार, 22 अक्तूबर 2010

शेयर बाजार पर ग्रहों का प्रभाव

प्राचीन काल से ही अज्ञानता जैसे शब्‍द से मानव जाति को सख्‍त नफरत रही है। शायद इसी कारण प्रकृति के उलझे हुए रहस्‍यों को न जान पाना उसके लिए एक भयंकर चुनौती बनी रही और उसने प्रकृति के सारी रहस्‍यों को सुलझाने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी । इसका परिणाम हम सब अपने सामने देख रहे हैं। प्रकृति के एक एक रहस्‍यों को सुलझाती, उससे निबटने में सफलता प्राप्‍त करते हुए कंदराओं और गुफाओं में रहने वाली जनजाति आज एक अतिविकसित प्राणी के तौर पर संसार में अपनी उपस्थिति दर्शा रही है। 

किन्‍तु भूत और वर्तमान को सुलझा पाने में इसे जितनी ही अधिक सफलता मिलती जा रही है, भविष्‍य उतने ही घने अंधेरे के रूप में इसके सामने मुंह चिढा़ता खडा़ हो रहा है। कल क्‍या होगा? किसी को पता नहीं। इस दिशा में भी गुत्त्थियों को सुलझा पाने की शुरूआत हमारे ऋषि, महर्षियों और योगियों ने की थी, ताकि जिस तरह हम एक रोशनी लेकर अनजान पथ पर भी आगे बढ़ जाते हैं, एक सहारा लेकर इस जीवन पथ पर भी चलें और भविष्‍य को जान पाने के लिए ज्‍योतिष शास्‍त्र के रूप में एक विज्ञान को विकसित किया गया। पर कालांतर में जब सभी शास्‍त्रों का नवीनीकरण किया गया, इस शास्‍त्र को अंधविश्‍वास समझते हुए इसे उपेक्षित छोड़ दिया गया। 

वैसे तो हर क्षेत्र में ही देखा जाए, तो भविष्‍य बिल्‍कुल अनिश्चित है, क्‍योंकि आज के अनिश्चितता के दौर में जब आम आदमी का जीवन ही निश्चित नहीं, तो किस पैसे, किस संपत्ति, किस डिग्री, किस जान परिचय और किस सगे संबंधी पर आप भरोसा कर सकते हैं? पर आज की तिथि में जो सर्वाधिक अनिश्चित दिखाई पड रहा है, वह है पूरे विश्‍व का शेयर बाजार, जिसके बारे में बिना किसी आधार के एक दो घंटे बाद की भविष्‍यवाणी कर पाना भी काफी मुश्किल हो गया है। इसका मुख्‍य कारण यह है कि आज के बाजार में शेयरों की खरीद बिक्री की कोई मुख्‍य वजह नहीं रह गई है। लोगों की मन:स्थिति में होने वाले परिवर्तन के बल बूते पर बाजार में खरीद और बिक्री का दौर जारी है और चूंकि लोगों की मन:स्थिति को प्रभावित करने में ग्रहों की भूमिका होती है, इसलिए अप्रत्‍यक्ष तौर पर ही सही, अभी सिर्फ और सिर्फ ग्रहों का ही प्रभाव शेयर बाजार पर देखने को मिल रहा है। 

ग्रहों के पृथ्‍वी के जड़ चेतन पर पड़ने वाले प्रभाव को जानने की एकमात्र विधा ज्‍योतिष ही है और इसे सही ढंग से विकसित कर पाने की दिशा में 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिषीय अनुसंधान केन्‍द्र' बोकारो द्वारा 20वीं सदी के अंतिम 40 वर्षों में बहुत बडा़ रिसर्च हुआ। ग्रहों की वास्‍तविक शक्तियों की खोज कर ज्‍योतिष को विज्ञान बना पाने सफलता मिलने से भविष्‍य को देख पाने के लिए एक तरह की रोशनी मिली, जो काफी हद तक स्‍पष्‍ट तो नहीं कही जा सकती, पर हमारे सामने भविष्‍य का एक धुंधला सा चित्र अवश्‍य खींच देती है। इसी के आधार पर 2008 के जनवरी से ही मै शेयर से संबंधित भविष्‍यवाणी करती आ रही हूं , जो प्रति सप्‍ताह मोल तोल डॉट इन में प्रकाशित होता आ रहा है और इसकी सत्‍यता से पाठक प्रभावित भी हैं।

एक महीने से तेज गति से चलते हुए शेयर बाजार को पिछले सप्‍ताह विराम लग गया है। सेंसेक्‍स और निफ्टी में थोडी सी बढत भी बिकवाली का दबाब पैदा कर देती है , जिसके कारण्‍ा निवेशकों के समक्ष थोडी आशंका बनी हुई है। इतने अच्‍छे स्‍तर पर लाभ लेने से वे वंचित नहीं रहना चाहते , पर 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के सिद्धांतों की माने , तो अभी आनेवाले समय में शेयर बाजार के सकारात्‍मकता को लेकर बडी दुविधा नहीं दिखाई दे रही। खासकर अभी 8 नवंबर तक बाजार फिर एक नई ऊंचाई हासिल करेगा। हां , उसके बाद छोटे मोटे करेक्‍शन जरूर देखे जा सकते हैं।


25 अक्‍तूबर सोमवार को बाजार की शुरूआत मजबूती से ही होगी , यदि नहीं तो एकाध घंटे में ही काफी मजबूती की संभावना दिखती है। निवेशक पूरे उत्‍साह में रहेंगे और सभी सेक्‍टरों में लिवाली होती दिखेगी। 26 अक्‍तूबर को भी दलाल स्‍ट्रीट में कमोबेश यही हाल रहेगा। पर इस सप्‍ताह लगभग प्रत्‍येक दिन की एक खासियत हो सकती है कि बाजार अंत अंत में कुछ कमजोर दिख सकता है। 27 , 28 और 29 अक्‍तूबर को बाजार सामान्‍य ढंग से खुलकर थोडी देर से मजबूत हो सकता है , इन तीनों दिनों में ऑयल और गेस सेक्‍टर में बडी बढत देखने को मिल सकती है। कुछ पाठको , जिन्‍हें हमारे द्वारा किए गए एक सप्‍ताह के आकलन से दूरस्‍थ प्‍लानिंग करने में सुविधा नहीं महसूस होती है , की इच्‍छा को ध्‍यान में रखते हुए , पूरे नवंबर भर के शेयर बाजार का आकलन किया जा चुका है। प्रतिमाह इस प्रकार का आकलन किया जा सकता है। सशुल्‍क उसे प्राप्‍त करने की इच्‍छा रखनेवाले हमारे ईमेल पर संपर्क कर सकते हैं।  

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