मंगलवार, 1 फ़रवरी 2011

वसंतपंचमी के बाद ही वसंत की दस्‍तक .... संगीता पुरी

जनवरी के प्रथम सप्‍ताह में लग्रभग सारे भारतवर्ष में शीतलहर चल रही थी और ठंड से लोगो का जीना मुहाल था , पहाडों में हो रही बर्फबारी , बादल , बारिश और कुहासे से रेल और हवाई यातायात प्रभावित थे , मैने उम्‍मीद जतायी थी कि 12 जनवरी के बाद मौसम बहुत सामान्‍य हो जाएगा और ऐसा ही हुआ था। हमारे देश के मैदानी भाग में फरवरी में वसंत का पदार्पण होता है , 8 फरवरी को वसंतपंचमी भी आनेवाली है , पर अभी कुछ दिनों से पुन: पहाडों में हो रही बर्फबारी और यत्र तत्र बारिश से ठंडी हवाएं चल रही है और भारतवर्ष का अधिकांश भाग पुन: ठंड से परेशान है। दिन में भले ही सूरज की तेज किरणें राहत देने में समर्थ हों , पर शाम होते ही ठिठुरन बढती जाती है। इस तरह मौसम ने एक बार फिर से करवट ली है , जिससे तापमान में भी हल्की गिरावट दर्ज की जा रही है।


वैसे तो दिसंबर के महीने की तुलना में तापमान अभी बढा हुआ ही रहेगी , पर ग्रहों की स्थिति पर ध्‍यान दिया जाए तो आनेवाले कुछ दिनों में बारिश ,कुहरा ,बर्फबारी आदि के यत्र तत्र होते रहने से ठंड से राहत मिलने की कोई उम्‍मीद नहीं दिखती। खासकर 8 फरवरी तक की ग्रहों की स्थिति मौसम को प्रतिकूल बनाए रखने में समर्थ है , इसलिए अब वसंत ऋतु के आने की उम्‍मीद वसंतपंचमी के बाद ही की जा सकती है। वैसे 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के हिसाब से इस बार कोई खास बडा ग्रहीय योग नहीं , सिर्फ चंद्रमा का 28 दिनों का चक्र है , जो आसमान में पिछले महीने 12 जनवरी के बाद मौसम परिवर्तन के स्‍थान पर पहुंच गया था और 31 दिन के जनवरी की वजह से इस बार तीन दिन पूर्व यानि 8 फरवरी के बाद ही उस स्‍थान पर पहुंच जाएगा। इसलिए इस योग के बहुत बडे स्‍तर पर कोई दुष्‍परिणाम देखने को नहीं मिलेंगे। इसलिए 8 फरवरी तक मौसम की खराबी बनी रहेगी , इस दिन या इसके बाद ही अधिकांश भागों में वसंत दस्‍तक देगा। 
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