रविवार, 6 फ़रवरी 2011

सिंह लग्‍नवालों के विभिन्‍न संदर्भों का आपस में सहसंबंध ....

आसमान के 120 डिग्री से 150 डिग्री तक के भाग का नामकरण सिंह राशि  के रूप में किया गया है। जिस बच्‍चे के जन्‍म के समय यह भाग आसमान के पूर्वी क्षितिज में उदित होता दिखाई देता है , उस बच्‍चे का लग्‍न सिंह माना जाता है। सिंह लग्‍न की कुंडली के अनुसार मन का स्‍वामी चंद्र द्वादश भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के खर्च , बाहरी संदर्भों आदि का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए सिंह लग्‍न के जातकों के मन को पूर्ण तौर पर संतुष्‍ट करने वाले संदर्भ खर्च और बाह्य संपर्क होते हैं। जन्‍मकुंडली या गोचर में चंद्र के मजबूत रहने पर खर्च शक्ति की मजबूत स्थिति और देशाटन वगैरह से सिंह लग्‍न के जातक का मन खुश और जन्‍मकुंडली या गोचर में चंद्र के कमजोर रहने पर इनकी कमजोर स्थिति से इनका मन आहत होता है।

सिंह लग्‍न की कुंडली के अनुसार समस्‍त जगत में चमक बिखेरने वाला सूर्य लग्‍न भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के शरीर , व्‍यक्तित्‍व और आत्‍मविश्‍वास का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए अपने नाम यश को फैलाने के लिए सिंह लग्‍न के जातक अपने शरीर को मजबूत बनाने पर जोर देते हैं। नाम यश फैलाने के लिए ये अपने व्‍यक्तित्‍व का ही स‍हारा लेना पसंद करते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के मजबूत रहने व्‍यक्तित्‍व की मजबूती से इनकी कीर्ति फैलती और जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के कमजोर रहने इनकी कमी से इनकी कीर्ति घटती है। 

सिंह लग्‍न की कुंडली के अनुसार मंगल चतुर्थ और नवम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के मातृ पक्ष , किसी प्रकार की छोटी या बडी संपत्ति , स्‍थायित्‍व और भाग्‍य का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों के मातृ पक्ष , किसी प्रकार की छोटी या बडी संपत्ति , स्‍थायित्‍व का भाग्‍य से  सहसंबंध होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के मजबूत रहने पर इन्‍हें मातृ पक्ष का सहयोग मिलता है , हर प्रकार की संपत्ति और स्‍थायित्‍व की मजबूती रहती है , जिससे भाग्‍य की मजबूती बनती है । विपरीत स्थिति में यानि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के कमजोर रहने पर भाग्‍य बहुत कमजोर हो जाता है। इसी प्रकार भाग्‍य के मजबूत होने का सर्वाधिक फायदा माता और हर प्रकार की संपत्ति को मिलता है , जबकि विपरीत स्थिति में ये पक्ष कमजोर बने होते हैं।

सिंह लग्‍न की कुंडली के अनुसार शुक्र तृतीय और दशम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के भाई , बहन , बंधु , बांधव पक्ष , पिता पक्ष और सामाजिक राजनीतिक स्थिति का  प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इनका आपस में सहसंबंध होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के मजबूत रहने पर सिंह लग्‍नवालों के सामाजिक राजनीतिक और कैरियर के मामलों की मजबूती में भाई बहन बंधु बांधव मददगार सिद्ध होते हैं और भाई बहन बंधु बांधव की मजबूती में सामाजिक राजनीतिक वातावरण। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के कमजोर रहने पर भाई बहन बंधु बांधव का सहयोग नहीं मिलता और ऐसे लोगों के कैरियर या सामाजिक राजनीतिक मामलों में बडी गडबडी आ जाती है।

सिंह लग्‍न की कुंडली के अनुसार बुध द्वितीय और एकादश भाव का स्‍वामी है और यह जातक के धन , कोष और लाभ से संबंधित मामलों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों के धन कोष को मजबूती देने में हर प्रकार के लाभ तथा लाभ को मजबूती देने में धन और कौटुम्बिक मजबूती का हाथ होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के मजबूत रहने पर ऐसे जातक अपनी मजबूत पूंजी के बल पर लाभ को मजबूती देने में समर्थ होते हैं और लाभ की मजबूती से कोष को मजबूती देने में समर्थ होते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के कमजोर रहने पर सिंह लग्‍नवाले धन की कमी से लाभ से और लाभ की कमी से कोष से वंचित रह जाते हैं ।

सिंह लग्‍न की कुंडली के अनुसार बृहस्‍पति पंचम और अष्‍टम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के बुद्धि , ज्ञान , संतान और जीवनशैली का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए सिंह लग्‍न के जातकों के बुद्धि , ज्ञान और संतान पक्ष का जीवनशैली पर बहुत प्रभाव देखा जाता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के मजबूत होने पर सिंह लग्‍न के जातकों का खुद का बुद्धि , ज्ञान या संतान पक्ष बहुत मजबूत दिखाई पडता है , जिससे जीवनशैली मजबूत बनी रहती है , उनकी जीवनशैली संतान पक्ष को मजबूती देती है। इसके विपरीत , जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के कमजोर होने पर सिंह लग्‍नवाले जातकों की अपनी सूझ बूझ और संतान पक्ष में गडबडी पैदा होती है , जिससे जीवन कमजोर हो जाता है और इससे आनेवाली पीढी के जीवन में भी गडबडी आती है।

सिंह लग्‍न की कुंडली के अनुसार शनि षष्‍ठ और सप्‍तम  भाव का स्‍वामी होता है यानि यह जातक के घर , गृहस्‍थी और झंझट का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍नवाले जातकों के घर गृहस्‍थी से संबंधित मामलों में झंझट आने की बहुत संभावना बन जाती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों के घर गृहस्‍थी या ससुराल का पक्ष बहुत मजबूत होता है , जो प्रभाव को बढाने में सहायक सिद्ध होता है। पर जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के कमजोर रहने पर सिंह लग्‍नवाले घर गृहस्‍थी के मामलों को लेकर बडा झंझट प्राप्‍त करते हैं , उनके ससुराल पक्ष का माहौल भी अच्‍छा नहीं होता।
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