शनिवार, 27 अगस्त 2011

2012 जुलाई के बाद शनि की ढैय्या समाप्‍त हो रही है ... जीवन में सुधार होगा !!

पाठकों के प्रश्‍नों के उत्‍तर देने के क्रम में ही आज का यह लेख है। जब से मैं ब्‍लॉग जगत में आयी हूं , व्‍यक्तिगत समस्‍याओं के लिए पाठक मेल करते ही रहते हैं। 28 मई 2009 को ही मेरे पास एक ईमेल आया ....


NAMSAKAARJI
AAPKI BHAVISHVANI THEEK RAHI PRANTU NUKSAAN TO HO HI GAYA.
YADI AAP UCHIT SAMJHE TO KIRPYA MERA MARGDARSHAN KARE :
DATE OF BIRTH 17 JULY, 1964
TIME : 15:43:25
PLACE : SIRSA - HARYANA
QUESTION :
BUSINESS
PARENTS CARE (KAR PAUNGA KE NAHI)
SAMAJ SEWA KAISI RAHEGI
SHIKSHA KE KHASHETAR MEIN KUCHH SEWA KAR RAHU HU, SAFAL HO PAUNGA YA NAHI
KRIPYA ANYATHA HI N LE
AABHAR.

समाजसेवा की भावना से ओत प्रोत इनके प्रश्‍नों से ही इनके व्‍यक्तित्‍व का अनुमान लगाया जा सकता है , ऐसे लोगों के जबाब देने में मुझे प्राथमिकता देनी चाहिए थी , पर ऐसा नहीं हो पाया। पता नहीं , किन ग्रहों का प्रभाव इनपर चल रहा था कि ये मेरी ओर से न तो सांत्‍वना और न ही शुभकामना प्राप्‍त कर सके। किसी न किसी वजह से मैं अन्‍यों को जबाब देती गयी , जबकि दो चार महीने में एक एक मेल कर ये मुझे याद दिलाते रहें। परिकल्‍पना सम्‍मान के बाद इन्‍होने मुझे बधाई दी और फिर याद कराया कि 'आप मेरी जन्‍मकुंडली का अध्‍ययन कीजिए , मैं आपका शुल्‍क चुका दूंगा।'

पर बात शुल्‍क की थी ही नहीं , बात मेरे पास समय की कमी की थी , इसलिए उनका काम अबतक नहीं हो सका था। वास्‍तव में तीन वर्ष की निरंतर व्‍यस्‍तता के बाद 5 अगस्‍त से मैं बिल्‍कुल निश्चिंत हूं और मनमौजी ढंग से पुराने कार्यों को समेटने की दिशा में काम कर रही हूं। इसी क्रम में मुझे इनकी याद आ गयी , अपने सॉफ्टवेयर में इनका जन्‍म विवरण डाला , तो ये ग्राफ प्राप्‍त हुआ .......



जन्‍मकुंडली के हिसाब से जीवन में किसी भी बात की कमी नहीं होनी चाहिए , पर मानसिक अशांति बनी रहती है। किसी भी कार्यक्रम में भाई बंधु या सहयोगी की कमी के कारण आगे बढने में दिक्‍कत होती है इस काले और लाल ग्राफ से हम देख सकते हैं कि 1994 तक ये आरामदायक ढंग से जीवन यापन कर रहे थे , पर वहां से 2006 तक इनकी महत्‍वाकांक्षा और स्‍तर का ग्राफ काफी तेजी से आगे बढा , उस हिसाब से सफलता का ग्राफ नहीं। यही कारण है कि इन्‍होने जितनी मेहनत की और जितने बडे स्‍तर पर अपनी योजनाएं बनायी , उतने बडे स्‍तर पर इनके लक्ष्‍य की पूर्ति नहीं हो पायी।
  

पिता की सेवा का बढिया मौका मिलेगा , पर माताजी से संबंधित मामले बहुत गडबड रहेंगे।
2005 से तो थोडी बहुत कठिनाई चल ही रही थी , 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के‍ हिसाब से 2009 से शनि के ढैय्या इनके सम्‍मुख और मुसीबतें लेकर आयी। 2012 जुलाई के बाद शनि की ढैय्या समाप्‍त हो रही है , जो काफी राहत उपस्थित करनेवाली होगी। उसके बाद ही लंबित बहुत सारे काम एक दो वर्षों के अंदर बनेंगे , पारिवारिक जीवन भी उसके एक वर्ष बाद बहुत हद तक सुखद बनेगा। शिक्षा के क्षेत्र में भी बढिया सफलता मिलेगी , समाज सेवा की दिशा में भी 2013 के बाद कदम बढेंगे। 

इससे पहले कुछ परेशानियां आती ही रहेंगी। 2013 से पूरा सुधार दिखेगा , वैसे तीन चार वर्ष के बाद ही पुन: परिस्थितियों से समझौता करते ही दिखेंगे , क्‍यूंकि हर वक्‍त महत्‍वाकांक्षा और मेहनत के हिसाब से कम ही मिल रहा है। यह बात अलग है कि पिछले तीन वर्षों से जितना झेलना पड रहा है , वैसी स्थिति आनेवाले दिनों में नहीं आएगी। क्रमश: सुधार होना चाहिए।

गणना करने के बाद जब उनसे बात हुई , तो उन्‍होने बताया कि 1963 या 1964 में से कोई भी वर्ष इनका जन्‍मवर्ष हो सकता है , पर इनके जीवन की घटनाएं 1963 के ग्रहों के हिसाब से मेल नहीं खायी , इसलिए मैने 1964 वाला जन्‍म विवरण ही लिया। इनके बेटे की जन्‍मकुंडली पर ध्‍यान दिया तो उसका भी बचपन ही कमजोर दिखा , बाकी वक्‍त वो बहुत ही स्‍वस्‍थ और सानंद रहेगा , जीवन में किसी बात की कमी नहीं दिखती , पर उसके मन मुताबिक माहौल उसके 12 वर्ष पूरे होने के बाद ही दिखेगा। तबतक छोटी मोटी परेशानी आती रहेगी।
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