सोमवार, 22 अगस्त 2011

मंगल के बुरे प्रभाव के दौर में अभी बहुत सारे युवा हैं ..... संगीता पुरी

20 अगस्‍त को प्रकाशित अपने लेख में मैने बताया कि कुछ दिनों के अंदर 7 मार्च से 27 अप्रैल 1982 , 22 अप्रैल से 6 जून 1984 और 25 जून से 29 जुलाई 1986 के मध्‍य जन्‍म लेनेवाले जातकों की जन्‍मकुंडलियां मुझे बहुत मिली हैं , क्‍यूंकि ये मंगल के सर्वाधिक प्रभाव वाले उम्र में यानि 24 वर्ष से 30 वर्ष की उम्र का जीवन व्‍यतीत कर रहे हैं। 18 वर्ष की उम्र के बाद से ही इनके जीवन में कुछ कठिनाइयां आनी शुरू हो गयी है और 24 वर्ष के बाद अपने जीवन जीने के ढंग को परिवर्तित करने के बाद भी इन्‍हें अपने कदम सफलता की ओर बढते नहीं दिखाई दे रहे हैं। इसलिए ये परेशान है और मुझसे सलाह लेने को बाध्‍य भी। इनकी समस्‍याओं की वजह मंगल है और इस कारण स्‍थायी तौर पर इनकी समस्‍याएं 30 वर्ष के बाद हल्‍के और 36 वर्ष की उम्र के बाद स्‍थायी तौर पर समाप्‍त हो सकेंगी।

यही नही , कुछ खास स्थिति में इसके आसपास जन्‍म लेने वालों को भी लगभग इस दौरान समस्‍याओं का सामना करना पड रहा है। हाल फिलहाल में एक जन्‍मविवरण मुझे यह मिला .....


जन्मतिथि - 14 मई 1986 
जन्मसमय - बुधवार सांयकाल 5.25 
जन्मस्थान - दिल्ली 

जब मैने इस जन्‍म विवरण को अपने सॉफ्टवेयर में डाला , तो ये ग्राफ मिला ....


जैसा कि इस ग्राफ से ही स्‍पष्‍ट है , जीवन ग्राफ 18 वर्ष की उम्र तक यानि 2004 तक सुखद परिस्थिति में जीवन यापन के बाद वहां से नीचे की ओर मुड गया है। इसी कारण वहां से कई प्रकार की बाधाएं शुरू हो गयी होंगी। खासकर पढाई लिखाई के मामलों में बारंबार बाधाएं आ रही होंगी। स्‍थायित्‍व का अभाव दिख रहा होगा। 2010 के बाद महत्‍वाकांक्षा बढी , बडे स्‍तर पर कुछ काम भी किया गया , जीवनशैली में कुछ परिवर्तन तो देखने को मिला , पर रोजगार की समस्‍या आ रही होगी। वैवाहिक मामलों की कठिनाई भी आनेवाले समय में दिखती है।

जैसा कि ग्राफ से स्‍पष्‍ट है 2016 तक कई प्रकार की बाधाओं के कारण जीवन मनोनुकूल नहीं रह पाएगा , अभी आनेवाले दो महीने भी कई दृष्टि से निराशाजनक दिखते हैं , पर ऐसा नहीं है कि जीवन में कभी कभी खुशियां नहीं दिखेंगी। गोचर के ग्रहों के मनोनुकूल होने से कभी कभी सुखद वातावरण बनेगा। चूंकि स्‍पष्‍ट तौर पर और कोई सवाल नहीं किए गए हैं , इसलिए छोटी छोटी समयावधि का उल्‍लेख करना कठिन है , पर बडे रूप में ग्रहों का साथ 2016 के बाद या अधिक स्‍पष्‍ट तौर पर 2022 के बाद ही मिलना आरंभ होगा।
अब दूसरे एक चार्ट पर नजर डालते हैं ......


इस चार्ट से स्‍पष्‍ट है कि इन्‍हें सबसे अधिक ऊर्जा भाग्‍य , खर्च करने की शक्ति और बाहरी संदर्भों से मिलती है , जबकि सबसे कम ऊर्जा विद्या , बुद्धि और ज्ञान के वातावरण से। स्‍पष्‍ट है कि पढाई लिखाई के वातावरण मे जितनी बाधाएं आयी , जीवनभर खर्च करने में तो नहीं आएंगी। इसलिए 2016 के बाद तेज गति से माहौल बदलेगा। मेरी शुभकामनाएं हमेशा इसके साथ होगी ......
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