शनिवार, 20 अगस्त 2011

बाबा नागेश्वर नाथ के दर्शन और पूजन से भक्‍तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं !!

पिछली बार गांव गयी तो सीतामढी जिले के एक प्रखंड पुपरी में स्थित बाबा नागेश्‍वर नाथ धाम जाने का मौका मिला। शहर के बाजार के बीचोबीच एक छोटे से प्रांगन में स्थित इस मंदिर की महत्‍ता दूर दूर तक फैली हुई है। कहते हैं कि लगभग 40 वर्ष पूर्व यहां एक खेल का मैदान था। कुछ बच्‍चे मैदान में खेल रहे थे कि छोटा सा कंचा पेड के नीचे एक दरार में  फंस गया। बच्‍चे ज्‍यों ज्‍यों इस कंचे को निकालने की कोशिश करते , यह और नीचे गहरे चला जाता। बच्‍चों ने खुरपी लाकर वहां से कंचा निकालना चाहा तो अंदर से पत्‍थर टकराने की आवाज आयी। उस आवाज की दिशा में खोदते हुए बच्‍चों ने जब अच्‍छी खासी मिट्टी निकाल ली , तो वहां एक शिवलिंग मिला ।  इसे संयोग ही कह सकते हैं कि जिस बच्‍चे को यह मिला , उसका नाम नागेश्‍वर था । खबर पूरे कस्‍बे तक आग की तरह फैली , सबने इनके लिए एक मंदिर का निर्माण किया। इस तरह यह  माना जाने लगा कि इस स्‍थान पर बाबा नागेश्वर नाथ के रूप में शंकर भगवान ने स्‍वयं को यहां स्‍थापित किया है , तो इसकी महत्‍ता निर्विवाद होनी ही थी। माना जाता है कि बाबा नागेश्वर नाथ के दर्शन और पूजन से भक्‍तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।




सावन के महीने में शिव शंकर की भक्ति में रमे शिव भक्तों की भक्ति यहां देखते ही बनती है। लाल पीले परिधान में कहीं कांवर लेकर जाते, तो कहीं बोल बम की जयकार लगाते ओम नम: शिवाय का जाप के साथ जलाभिषेक करते पूरे दिन विभिन्न नदी घाटों से जल लेकर पहुंचते है और बाबा नागेश्वर नाथ महादेव का जलाभिषेक करते हैं। 

गुरुवार, 18 अगस्त 2011

बाढ से प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के लिए एक अच्‍छी खबर .... संगीता पुरी

काफी दिनों से ब्‍लॉग लेखन में अनियिमितता बनी हुई है , कई तरह के पूर्वानुमान मन में ही रह जाते हैं , जिसके कारण पाठक जानकारी से वं‍चित रह रहे हैं। पहले मैं मौसम के क्षेत्र की भवष्यिवाणियां हमेशा किया करती थी , जिससे आम जन को मौसम के बारे में अच्‍छी जानकारी बनी रहती थी , पर काफी दिनों से कुछ लिख न सकी। अभी कई दिनों से समाचार पत्रों में लगातार बाढ से जुडी घटनाएं पढने के बाद एक ग्रहस्थिति की ओर मेरा ध्‍यान गया और मैने मौसम के अंतर्गत अपने पुराने लेख ढूंढे। 28 अप्रैल को प्रकाशित किए गए इस लेख के अंतिम अनुच्‍छेद में साफ साफ लिखा है कि 17 अगस्‍त के आसपास भी बहुत सारे क्षेत्रों में अत्‍यधिक बारिश के कारण बाढ जैसी परेशानियों का भी सामना करना पड सकता है। गूगल की 24 घंटों की खबरों में भी आज 18 अगस्‍त को बाढ से जुडी खबरे काफी दिखाई पड रही हैं। ये रहीं अलग अलग स्‍थान पर अलग अलग नदियों से जुडी अलग अलग खबरें.......

हथिनीकुंड बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण बुधवार को यमुना नदी खतरे के निशान को पार कर गई। नदी के लेवल में लगातार इजाफा हो रहा है। बाढ़ के संभावित खतरे से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने व्यापक इंतजाम किए हैं।        पहाड़ों पर बरसात और बिजनौर बैराज से तीन लाख 76 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने से गंगा नदी के तटवर्ती गांवों में खलबली मची है। गुरूवार को नदी खतरनाक रूप धारण कर सकती है। सूख चुकी सोत नदी उफना गयी है।              भारी बारिश के चलते पूर्वी उत्तर प्रदेश के बाद अब पश्चिमी हिस्से में बाढ़ की तबाही शुरू हो गई है। बाढ़ से जहां दर्जनों गांव प्रभावित हुए हैं वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या -24 के पानी में डूब जाने से इस पर यातायात ठप्प पड़ गया है। भारी बारिश से मुरादाबाद, रामपुर, अमरोहा, शाहजहांपुर और बरेली जिलों में रामगंगा, मालन और कोसी नदियां उफान पर हैं, जिससे इन जिलों के कई निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है।              शारदा सागर बांध से लगभग चार लाख क्यूसेक पानी रिलीज करने के कारण क्षेत्र के कई दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में हैं। प्रशासन द्वारा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी गई है, परंतु नागरिकों की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किये गये हैं और न ही बाढ़ राहत चौकी पर किसी अधिकारी या कर्मचारी का ही पता है। दो दिनों से लगातार हो रही मूसलधार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।                सांकरा क्षेत्र में फिर बाढ़ के आसार नजर आने लगे हैं। यहां से गुजर रही गंगा पहले से ही लबालब थी, अब उसमें हरिद्वार से चार लाख क्सूसिक पानी छोड़ दिया गया है। इसे लेकर आसपास के ग्रामीणों में भय व्याप्त है। सांकरा में गंगा खतरे के निशान के आसपास ही बह रही है। अब जानकारी मिली है कि हरिद्वार से गंगा में चार लाख क्यूसिक पानी बुधवार को छोड़ दिया गया। 
सतलुज दरिया में बढ़ रहे जलस्तर से क्षेत्र में बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। पानी कम न होने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। दूसरी ओर प्रशासन की ओर से कोई सुविधा न मिलने से लोगों में खासा रोष है। हिमाचल प्रदेश में हो रही बारिश से भाखड़ा डैम में पानी का स्तर बढ़ रहा है। यहां से बार-बार पानी छोड़ने से फतेहगढ़ पंजतूर क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति बन गई है। लोगों के मकान, खेत और रास्ते बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।            पाकिस्तान के दक्षिण हिस्से में मॉनसूनी बारिश से विशाल क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आ गया है और कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई एवं 10 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। दक्षिण सिंध प्रांत के मुख्यमंत्री कैयम अली शाह ने कहा कि बारिश और नहरों के तटबंध में दरार से छह जिलों में 10 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कराची में बताया कि 30 लोग बाढ़ के कारण मारे गए हैं।

पुराने लेख की चर्चा करते हुए मैं यह जानकारी देना चाह रही हूं कि जब अभी तक की बारिश प्रकृति के किसी किसी नियम के हिसाब से हो रही है , तो आनेवाले दिनों में बारिश भी उसी नियम के आधार पर होगी। 17 अगस्‍त तक की घनघोर बारिश के बाद बारिश में कुछ कमी आएगी , हालांकि अभी 6 सितंबर तक अच्‍छी बारिश के योग हैं ही , खासकर ग्रहों की दृष्टि से अभी निकट की तीन तिथियां 19 , 20 और 21 अगस्‍त भी अच्‍छी खासी बारिश वाली हैं , अब दो चार दिनों में लोगों को बाढ के पानी से राहत मिलनी आरंभ हो जाएगी और यह बाढ से प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के लिए बहुत अच्‍छी खबर है।

सोमवार, 15 अगस्त 2011