शनिवार, 25 जनवरी 2014

2014 में कब किस लग्‍नवालों के हाथो में लगेगी मेहंदी .... किस लग्‍नवाले माथे पे सजेगा सेहरा ? ( Astrology )




'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के हिसाब से विवाहित पति पत्‍नी के परस्‍पर संबंधों को प्रगाढ बनाने , युवक और युवतियों के मध्‍य प्रेम प्रसंगों का सुदृढ बनाने तथा विवाह के योग उपस्थित करने में स्‍थैतिक ग्रहों की भूमिका होती है। इस दृष्टि से देखा जाए तो इस वर्ष सभी लग्‍नवालों के ऐसे योग इन दिनों में होंगे .....

मेष लग्‍नवालों के लिए ... वर्ष 2013 में सबसे पहले बुध ग्रह 6 नवंबर से 19 नवंबर तक आसमान में स्‍थैतिक ऊर्जा संपन्‍न रहेगा , यह वैवाहिक मामलों में सक्रियता और गंभीरता देगा , दूसरा योग शुक्र ग्रह के स्‍थैतिक शक्ति संपन्‍न होने के कारण 24 अक्‍तूबर से 24 दिसंबर 2013 तक तथा 28 जनवरी से 27 मार्च 2014 तक बनेगी , तीसरा योग शनि के स्‍थैतिक शक्ति संपन्‍न होने से 2014 में 8 फरवरी से 2 मार्च तथा 19 जुलाई से 11 अगस्‍त के मध्‍य बनता है , इस तरह कुल मिलाकर मेष लग्‍न वालों के विवाह की संभावना इस वर्ष बहुत ही अधिक है , कुंडली में कोई बडा दुर्योग होने से ही इस वर्ष विवाह न होने का दबाब इन लग्‍नवालों को झेलना होगा।

वृष लग्‍नवालों के लिए ... मंगल के स्‍थैतिक शक्ति संपन्‍न बने रहने के कारण 25 दिसंबर 2013 से 2 मार्च 2014 के मध्‍य तथा 26 मई से 23 जुलाई 2014 के मध्‍य वैवाहिक सुखद संयोग की संभावना बनती है , 2 मार्च से 26 मई के मध्‍य विवाह में कुछ बाधाएं उपस्थित होंगी , खासकर 9 अप्रैल के आसपास तो किंकर्तब्‍यविमूढता की स्थिति बनी रहेगी।

मिथुन लग्‍नवालों के लिए ... बृहस्‍पति के स्‍थैतिक शक्ति संपन्‍न होने से 13 अक्‍तूबर से 4 नवंबर 2013 तथा 6 मार्च से 7 अप्रैल 2014 तक इनके विवाह की संभावना बनती है , साथ ही शुक्र के 24 अक्‍तूबर से 24 दिसंबर 2013 तक तथा 28 जनवरी से 27 मार्च 2014 तक स्‍थैतिक ऊर्जा संपन्‍न बने होने के कारण इस दौरान भी विवाह कार्य संपन्‍न होने की संभावना रहेगी , हां जनवरी 2014 के मध्‍य का समय कुछ क्रिकर्तब्‍यविमूढावस्‍था का हो सकता है 

कर्क लग्‍नवालों के विवाह के लिए ... 8 फरवरी से 2 मार्च तथा 19 जुलाई से 11 अगस्‍त 2014 तक का समय शनि के स्‍थैतिक शक्ति संपन्‍नता का है , इसलिए इस वक्‍त उनके विवाह से संबंधित क्रियाकलापों के आगे बढने की संभावना है , मार्च और अप्रैल में शुक्र की स्‍थैतिक शक्ति संपन्‍नता इनके वैवाहिक कार्यक्रमों को सकारात्‍मक स्‍वरूप दे सकती है। पर मई 2014 के मध्‍य का समय इनके लिए अच्‍छा नहीं रहेगा।

सिंह लग्‍नवालों के लिए ... सबसे पहले तो 1 फरवरी से 18 मार्च के मध्‍य बुध ग्रह की स्‍थैतिक क्षमता इनके विवाह के लिए अच्‍छा योग बना सकती है , इसके अलावे 8 फरवरी से 2 मार्च तथा 19 जुलाई से 11 अगस्‍त 2014 तक का समय शनि के स्‍थैतिक शक्ति संपन्‍नता का है , इसलिए इस वक्‍त उनके विवाह से संबंधित क्रियाकलापों के आगे बढने की संभावना है।पर मई 2014 के मध्‍य का समय इनके लिए अच्‍छा नहीं रहेगा।

कन्‍या लग्‍नवालों के लिए ... 13 अक्‍तूबर से 4 नवंबर 2013 तथा 6 मार्च से 7 अप्रैल 2014 को बृहस्‍पति की स्‍थैतिक शक्ति संपन्‍नता इनके विवाह के लिए मनोनुकूल माहौल तैयार कर सकती है , दिसंबर और जनवरी का समय इनके लिए काफी मनोनुकूल नहीं रह सकता है।

तुला लग्‍न वालों के लिए ... 25 दिसंबर 2013 से 2 मार्च 2014 तक तथा 26 मई से 23 जुलाई 2014 तक मंगल कं स्‍थैतिक शक्ति संपन्‍न होने की वजह से इनके वैवाहिक मामलों का कार्यक्रम इस वक्‍त रहने की उम्‍मीद है , मार्च और अप्रैल का समय वैसा मनोनुकूल नहीं होगा।

वृश्चिक लग्‍न वालों के लिए ....शुक्र के 24 अक्‍तूबर से 24 दिसंबर 2013 तक तथा 28 जनवरी से 27 मार्च 2014 तक स्‍थैतिक ऊर्जा संपन्‍न बने होने के कारण इस दौरान भी विवाह कार्य संपन्‍न होने की संभावना रहेगी , हां जनवरी 2014 के मध्‍य का समय कुछ क्रिकर्तब्‍यविमूढावस्‍था का हो सकता है 

धनु लग्‍नवालों के लिए ... 13 अक्‍तूबर से 4 नवंबर 2013 तथा 6 मार्च से 7 अप्रैल 2014 को बृहस्‍पति की गत्‍यात्‍मक शक्ति संपनन्‍ता विवाह के योग बना सकती है , इसके अलावे 6 अक्‍तूबर से 19 नवंबर 2013 , 1 फरवरी से 18 मार्च 2014 तथा 24 मई से 14 जुलाई 2014 तक बुध के गत्‍यात्‍मक शक्ति संपन्‍न होने की वजह से भी कोई सुखद संयोग इस समय बन सकता है।

मकर लग्‍वालों के लिए ... जुलाई से सितंबर 2013 तक ही कई ग्रहों के कारण विवाह के योग थे , आगे बहुत छोटी संभावनाएं दिखती हैं।

कुंभ लग्‍नवालों के लिए ... 25 दिसंबर से 2 मार्च 2013 तथा 26 मई से 23 जुलाई 2014 को मंगल की गत्‍यात्‍मक शक्ति संपन्‍नता इनके वैवाहिक मामलों में सहयोगी सिद्ध हो सकती है , मार्च और अप्रैल खास निराशाजनक माह हो सकते हैं।

मीन लग्‍न वालों के लिए ... 25 दिसंबर से 2 मार्च 2013 तथा 26 मई से 23 जुलाई 2014 को मंगल की गत्‍यात्‍मक शक्ति संपन्‍नता इनके वैवाहिक मामलों में सहयोगी सिद्ध हो सकती है , इसके अलावे 6 अक्‍तूबर से 19 नवंबर 2013 , 1 फरवरी से 18 मार्च 2014 तथा 24 मई से 14 जुलाई 2014 तक बुध के गत्‍यात्‍मक शक्ति संपन्‍न होने की वजह से भी कोई सुखद संयोग इस समय बन सकता है।


दुनिया भर में कैसा रहेगा 2014 का मौसम ?? ( Astrology )

दुनिया भर के वैज्ञानिक क्‍या आमजन भी शायद ही इस बात पर विश्‍वास कर सकें कि पृथ्‍वी का मौसम आसमान में स्थित ग्रहों से प्रभावित होता है। हालांकि आरंभ से ही परंपरागत ज्‍योतिष में माना जाता है कि विश्‍व के मौसम को प्रभावित करने में आसमान में स्थिति ग्रहों नक्षत्रों की खास भूमिका होती है, सूर्य की स्थिति और गति का मौसम पर प्रभाव को हम स्‍पष्‍ट देखते हैं , सूर्य के उत्‍तरायण और दक्षिणायन होते ही दोनो गोलार्द्धों का मौसम परिवर्तित हो जाता है , हर स्‍थान पर उसके उदय और अस्‍त होते ही तापमान बदल जाता है। पर सूर्य का प्रभाव हमें आंखों से दिख जाता है और अन्‍य ग्रहों का नहीं दिखता .....

और ज्‍योतिष में अन्‍य ग्रहों के सूत्र इतने प्रभावी न थे कि इस बात पर विश्‍वास किया जा सके कि ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ का वैज्ञानिक दृष्टिकोण इसपर भरोसा कर सके। एक पर ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ को कुछ सूत्र ऐसे अवश्‍य मिले जिनकी बदौलत पूरी दुनिया को भरोसा दिलाया जा सकता है कि आसमान में बन रही ग्रह स्थिति का प्रभाव पूरी दुनिया के मौसम पर एक साथ पडता है , भले ही स्‍थानीय कारकों के कारण स्‍थानीय मौसम में परिवर्तन हो। हमने पूरे वर्ष 2014 के मौसम के बारे में इस लेख में लिखने की कोशिश की है , पाठकों से कहूंगी कि इसे ऐसी जगह रखें , ताकि इसमें हमेशा उनकी नजर पडती रहे , और साल के अंत में हमें टिप्‍पणी दे सकें , ताकि अगले वर्ष के मौसम की भविष्‍यवाणी में और सुधार लाया जा सके।

हमारे परंपरागत ज्‍योतिष में सूर्य के अलावा चार ग्रहों को शुभ माना जाता है , जो बृहस्‍पति , शुक्र , बुध और चंद्र हैं। इन चारो ग्रहों की खास स्थिति से मौसम में परिवर्तन की संभावना होती है। पर इससे स्‍पष्‍ट नहीं हो पाया कि किस हालत में अधिक बारिश या कम बारिश की संभावना रहेगी।  ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ को रिसर्च में जो तत्‍व मिले , उस आधार पर 2014 के ग्रहों के सापेक्ष इस वर्ष में मौसम के उतार चढाव की चर्चा कर रही हूं।
  1. 2014 में मौसम को प्रभावित करने वाला पहला ग्रहयोग 1 जनवरी से छह अप्रैल तक रहेगा , जिसकी शुरूआत सितंबर 2013 से ही हो चुकी है। वैसे तो इस योग को शुभ ग्रहों का योग कहते हैं , जिसकी बादल बनाने और बारिश करवाने में महत्‍यपूर्ण भूमिका है , पर पृथ्‍वी के अलग अलग भाग में वहां के स्‍थानीय मौसम के हिसाब से अलग अलग तरह की बातें होती हैं। जिस जगह गर्मी का मौसम हो , वहां हल्‍की फुल्‍की बारिश से मौसम को सुहावना बनाती है , जबकि सर्दी वाले जगहों पर बारिश से मौसम सर्द हो जाता है , तथा बारिश वाली जगहों पर अतिवृष्टि से बाढ की भी संभावना बनती है, बर्फ गिरनेवाली जगहों पर बर्फबारी भी होती है। इसलिए यह ग्रहयोग कहीं कष्‍टकर तो कहीं सुखद वातावरण बना देती है। यदि इस दौरान कुछ खास तिथियों की बात की जाए तो 13 से 16 जनवरी के बाद 9 से 13 फरवरी , 8 से 12 मार्च और 5 से 9 अप्रैल तक का वातावरण इस ग्रहयोग के लिए खास होगा। बीते जनवरी के प्रथम सप्‍ताह के बाद मार्च के प्रथम सप्‍ताह और अप्रैल के प्रथम सप्‍ताह में इस योग की क्रियाशीलता खास है।
  2. इसी प्रकार दूसरा ग्रहयोग 1 जनवरी से 1 अप्रैल तक बना रहेगा , जिसकी शुरूआत भी नवंबर 2013 से हुई है। इस ग्रहस्थिति की प्रकृति भी पहले बिंदू की तरह ही होगी , जो कहीं सुखद , कहीं कष्‍टकर वातावरण प्रदान कर सकती है। इस ग्रहयोग के कारण खास तिथियों की बात की जाए , तो 1 से 4 जनवरी के बाद 27 से 30 जनवरी , 24 से 27 फरवरी , 25 से 28 मार्च तक का वातावरण इस ग्रहस्थिति के लिए खास होगा। जनवरी के मध्‍य के बाद जनवरी के अंतिम सप्‍ताह और मार्च के अंतिम सप्‍ताह में इसकी क्रियाशीलता बढी होनी चाहिए।
  3. ऐसा ही तीसरा ग्रहयोग 31 जनवरी से 15 मार्च तक होने जा रहा है , इसकी प्रकृति भी पहले बिंदू की तरह ही होगी, जिससे कहीं कष्‍टकर तो कहीं सुखद माहौल बनेगा। इसकी तीव्रता फरवरी के दूसरे सप्‍ताह , फरवरी के अंतिम सप्‍ताह तथा मार्च के दूसरे सप्‍ताह में बनेगी , महत्‍वपूर्ण तिथियों पर ध्‍यान दिया जाए तो 1 से 3 फरवरी , 26 से 28 फरवरी और 27 से 30 मार्च तक का समय काफी महत्‍वपूर्ण होगा। हां इस दौरान 9 फरवरी से 26 फरवरी तक के समय में गर्मी वाले प्रदेशों में गर्मी तथा सर्दी वाले प्रदेशों में सर्दी अधिक पडने की संभावना है।

ऊपर के तीनो बिंदुओं के तिथियों को देखते हुए यह समझा जा सकता है कि दुनियाभर में इस वर्ष 1 जनवरी से 6 अप्रैल तक क्‍या , सितंबर 2013 के बाद ही हर जगह बादल बनने , बारिश होने , बर्फ गिरने और ठंड बढाने की मुख्‍य वजह ये तीनों ग्रहयोग हो सकते हैं। इस दौरान 4 से 7 फरवरी तथा 9 से 12 मार्च के मध्‍य चक्रवात बनने तथा तूफान आने का योग भी बन रहा है , यहां पर हमें प्रकृति का और भयावह स्‍वरूप देखने को मिल सकता है , जो सूनामी तक के लिए जिम्‍मेदार हो सकते हैं। पर 6 अप्रैल के बाद 24 मई तक किसी भी देश के मौसम में सूर्य के अलावा बाहरी ग्रहों का प्रभाव नहीं देखने को मिल रहा है , इसलिए उसके बाद की मौसम की स्थिति हर जगह सामान्‍य ही रहेगी।
  1. ऐसा ही चौथा योग 24 मई से 14 जुलाई तक बन रहा है , इसकी प्रकृति भी उपरोक्‍त बिंदुओं के हिसाब की ही है , जिसके कारण मौसम बिगडने की संभावना बनती है। मई के अंतिम सप्‍ताह , 7 या 8 जून तथा जून के तीसरे सप्‍ताह , 1 या 2 जुलाई तथा जुलाई के दूसरे सप्‍ताह में इसकी क्रियाशीलता बढी होनी चाहिए। इस योग के दौरान महत्‍वपूर्ण तिथियों की बात की जाए तो 30, 31 मई , 1, 2 जून तथा 26 से 29 जून होगी। इस दौरान 21 से 24 मई तथा 15 से 18 जुलाई को भी ग्रहस्थिति चक्रवात पैदा कर बडा तूफान लाने में समर्थ होगी। इस दौरान 10 जून से 29 जून के मध्‍य दुनिया में गर्मी वाले जगहों पर भीषण गर्मी तो ठंडी जगहों पर कडाके की ठंड पडती रहेगी। पर पुन: 14 जुलाई से 21 सितंबर के मध्‍य का मौसम हर जगह सामान्‍य रहेगा।
  2. ग्रहों के मेल से बनने वाला पांचवां योग 21 सितंबर से 2 नवंबर के मध्‍य बन रहा है। इसकी प्रकृति भी उपरोक्‍त बिंदुओं के हिसाब की ही है , जिसके कारण मौसम बिगडने की संभावना बनती है। सितंबर के तीसरे सप्‍ताह , अक्‍तूबर के पहले सप्‍ताह , अक्‍तूबर के मध्‍य अक्‍तूबर के तीसरे सप्‍ताह और नवंबर के अंतिम सप्‍ताह में इसकी कार्यशीलता बढी हुई होगी। इस दौरान की महत्‍वपूर्ण तिथियों की बात की जाए तो वो 26 से 29 सितंबर तथा 21 से 27 अक्‍तूबर होंगी। इस दौरान 12 से 18 सितंबर तथा 2 से 5 नवंबर तक की ग्रहस्थिति पुन: चक्रवात पैदा कर तूफान लाने में तथा जहां तहां बारिश करवाकर ठंड बढाने में समर्थ होगी। 7 अक्‍तूबर से 21 अक्‍तूबर तक का ग्रहयोग गर्मी के मौसम वाले जगहों पर में अत्‍यधिक गर्मी तथा जाडे के मौसम वाले जगहों पर अत्‍यधिक ठंड का अहसास कराता है।
  3. ग्रहों के मेल से 14 नवंबर से 31 दिसंबर तक एक और ग्रहयोग बन रहा है , जिसकी कियाशीलता मध्‍य नवंबर और 3 से 12 सितंबर के मध्‍य होगी। 12 , 13 , 14 नवंबर तथा 9 से 12 दिसंबर भी इसके प्रभाव की तिथियां हैं। इसकी वजह से भी वातावरण में नमी बनी रहेगी।
2014 के उपरोक्‍त योग के ग्रहों के प्रभाव से पूरी दुनिया में बादल बारिश , चक्रवात और तूफान के बडे बडे योग की चर्चा मैने तिथि के साथ की है। पर इस वर्ष इन शुभ ग्रहों के साथ साथ अशुभ ग्रहों को प्रभाव भी जनवरी से अगस्‍त तक मौजूद हैं , जो शुभ प्रभाव को खासकर बनने नहीं देते , इस कारण अतिवृष्टि और अनावृष्टि का योग देखने को मिलता रहेगा , जहां जरूरत है वहां बारिश न होकर जहां जरूरत नहीं है , वहां बारिश होगी , कुल मिलाकर इस बार प्रकृति किसी भी मौसम में हमारे अनुकूल नहीं रहेगी।