बुधवार, 30 दिसंबर 2009

2012 में इस दुनिया के अंत की संभावना हकीकत है या भ्रम ? (दूसरी कडी)

2012 में इस दुनिया के अंत की संभावना हकीकत है या भ्रम ? इसकी पहली कडी को लिखने के बाद दूसरे कार्यों में व्‍यस्‍तता ऐसी बढी कि आगे लिखना संभव ही न पाया। 2012 दिसंबर को दुनिया के समाप्‍त होने के पक्ष में जो सबसे बडी दलील दी जा रही है , वो इस वक्‍त माया कैलेण्‍डर का समाप्‍त होना है। माया सभ्यता 300 से 900 ई. के बीच मेक्सिको, पश्चिमी होंडूरास और अल सल्वाडोर आदि इलाकों में फल फूल रही थी , इस सभ्यता के कुछ अवशेष खोजकर्ताओं ने भी ढूंढे हैं। माना जाता है कि माया सभ्यता के लोगों को गणित, ज्‍योतिष और लेखन के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल थी। माया सभ्यता के लोग मानते थे कि जब इस कैलिंडर की तारीखें खत्म होती हैं, तो धरती पर प्रलय आता है और नए युग की शुरुआत होती है। इसका कैलिंडर ई. पू. 3114 से शुरू हो रहा है, जो बक्तूनों में बंटा है। इस कैलिंडर के हिसाब से 394 साल का एक बक्तून होता है और पूरा कैलिंडर 13 बक्तूनों में बंटा है, जो 21 दिसंबर 2012 को खत्म हो रहा है।


वैसे तो माया कैलेण्‍डर के आधार के बारे में मुझे पूरी पूरी जानकारी नहीं , फिर भी माया कलेंडर में एक साथ दो दो साल , पहला 260 दिनों का और दूसरा 365 दिनों के चलते थे। मैं समझती हूं कि 365 दिन का साल तो निश्चित तौर पर सौर गति पर आधारित होता होगा , जबकि 260 दिनों का साल संभवत: 9 चंद्रमास का होता हो। इस तरह इसके 4 चंद्रवर्ष पूरे होने पर 3 सौरवर्ष ही पूरे होते होंगे , जिसका सटीक तालमेल करते हुए वर्ष के आकलन के साथ ही साथ ग्रह नक्षत्रों और सूर्यग्रहण , चंद्रग्रहण तक के आकलन का उन्‍हें विशिष्‍ट ज्ञान था। इससे उनके गणित ज्‍योतिष के विशेषज्ञ होने का पता तो चजता है , पर फलित ज्‍योतिष की विशेषज्ञता की पुष्टि नहीं होती है। कोर्नल विश्वविद्यालय में खगोलविद ऐन मार्टिन का भी कहना है कि माया कैलेंडर का डिजायन आवर्ती है। ऐसे में कहना कि दीर्घ गणना दिसंबर 2012 को समाप्त हो रही है, सही नहीं है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे हमारी सभ्यता ने नई सहस्त्राब्दी का स्वागत किया था। इस प्रकार यह माना जा सकता है कि माया कैलेण्‍डर के वर्ष का समाप्‍त होना बिल्‍कुल सामान्‍य घटना है।

हम सभी जानते हैं कि घडी या कैलेण्‍डर समय को याद रखने का एक माध्‍यम भर है , यह अपने में बिल्‍कुल तटस्‍थ है और हरेक व्‍यक्ति को अपनी सुविधानुसार इसका उपयोग करना होता है। न तो किसी प्रकार की खुशी और न ही किसी प्रकार के गम से इसका कोई लेना देना होता है। अपनी सुविधा के लिए हम घडी और कैलेण्‍डर की तरह अन्‍य साधनों का निर्माण करते हैं। किसी न किसी दिन सबका अंत होना ही है , कंप्‍यूटर इंजीनियरों द्वारा कंप्‍यूटर के सॉफ्टवेयर की प्रोग्रामिंग 2000 तक के लिए की गयी थी। 2000 के एक दो वर्ष पूर्व से ही इस बात को लेकर हंगामा मचा हुआ था कि Y2K की समस्‍या के कारण हमारे सारे कंप्‍यूटर बेकार हो जाएंगे , पर ऐसा नहीं हुआ। उस समस्‍या को दूर किया गया और आज भी हम उसका उपयोग कर रहे हैं। पिछले लेख में आपने पढा कि 2010 तक ही अपने सॉफ्टवेयर की प्रोग्रामिंग किए होने से 2012 दिसंबर की ग्रहीय गणना में मेरे समक्ष भी बाधा आयी। अब यदि इस मध्‍य मैं दुनिया में न होती , तो मेरे किसी शिष्‍य के द्वारा इस बात का भयावह अर्थ लगाना भी संभव था। किसी असामान्‍य परिस्थिति में इस प्रकार का भ्रम पैदा हो जाना बिल्‍कुल स्‍वाभाविक है , पर हर वक्‍त हमें अपने विवेक से काम लेना चाहिए। सिर्फ माया कैलेण्‍डर की चर्चा में ही पोस्‍ट की लंबाई बढ गयी है , जबकि 2012 के प्रलय की संभावना के बारे में बहुत सारे सबूत जुटाए गए हैं , सबकी चर्चा के लिए फिर अगली कडी का इंतजार करवाने को बाध्‍य हूं।






21 टिप्‍पणियां:

संगीता पुरी ने कहा…

राज भाटिय़ा ने आपकी पोस्ट " 2012 में इस दुनिया के अंत की संभावना हकीकत है या भ... " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

संगीता जी आप के लेख का इंतजार है, लेकिन मै नही मानता कि यह सब होगा,सब एसे ही चलेगा जेसा अब चल रहा है बस कुछ उथल पुथल शायद हो, जो आम होती है भुकम्प के आने से बाड आने से!

संगीता पुरी ने कहा…

महफूज़ अली ने आपकी पोस्ट " 2012 में इस दुनिया के अंत की संभावना हकीकत है या भ... " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

बहुत अच्छा और सार्थक लेख....

आभार....

आपको नव वर्ष की अग्रिम शुभकामनाएं....

संगीता पुरी ने कहा…

सुबह इस पोस्‍ट के प्रकाशित होने के बाद राज भाटिया जी और महफूज अली जी की ओर से दो टिप्‍पणियां मिलने के बाद मेरी गल्‍ती से यह पोस्‍ट मिट गयी थी .. अभी मैने इसे फिर से पोस्‍ट कर दिया है .. इसलिए उनकी टिप्‍पणियों को भी स्‍थान दे दिया।

सौरभ शर्मा ने कहा…

आपने सही कहा माया सभ्यता का कलेंडर ख़तम होना दुनिया के ख़तम होने का सूचक नहीं है .
अगली कड़ी का इन्तजार रहेगा ...

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

mahapralay ke bare me aapki yah dusari shrinkhala bhi kabhi jaankari bhari hai..maya calender se sambandhit jaankari bahut jnyanvardhak lagi..bahut bahut aabhar aapka..
jo bhi sach to samane hi aayega par abhi se bhaybhit hokar jine ka utsaah na kam kare log bas yahi kamna hai .,,agali kadi ka intzaar hai..naye saal ki hardik badhai!!!

डॉ टी एस दराल ने कहा…

संगीता जी, हमें तो ये भ्रम ही लगता है।
वैसे भी डॉक्टर्स तो झूठा दिलासा देते ही रहते हैं।
नव वर्ष की शुभकामनायें।

vinay ने कहा…

माया सभ्यता के बारे में दूरदर्शन पर देखा था,उसमें बताया गया था,कि 2012 के बाद माया सभ्यता का कलेन्डर समाप्त है,इसी कारण यह भ्रम पैदा हो गया कि 2012 दुनिया का अन्त है ।
आपको आने वाले नववर्ष की बहुत,बहुत शुभकानायें।

निर्मला कपिला ने कहा…

संगीता जी अगली कडी का बेसब्री से इन्तज़ार है धन्यवाद्

राज भाटिय़ा ने कहा…

संगीता जी आप की बात से सहमत है, घडी ओर केलेंडर हमारे अपने लाभ के लिये , हमारी सुविधा के लिये बने है,इस लिये इन सब बातो पर विशवास नही करना चहिये, वेसे छोटी मोटी घटना तो किसी भी समय हो सकती है, ओर उसे तुल नही देना चाहिये, आप ने बहुत सुंदर लिखा.
धन्यवाद

योगेश स्वप्न ने कहा…

punah prateeksharat, nav varsh ki shubh kaamnayen.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

2 साल और जी लेते हैं जी!
बढ़िया पोस्ट!

cmpershad ने कहा…

आशा जगाता लेख॥ वैसे आसार तो ग्लोबल वार्मिंग के कारण स्थिति गम्भीर होती जा रही है॥

Udan Tashtari ने कहा…

2010 तो खत्म ही समझो...लग गया है तो निकला ही जानो..बाकी देखा जायेगा..अगली कड़ी जल्दी पढ़वाईये..समय कम है. :)



यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि आप हिंदी में सार्थक लेखन कर रहे हैं।

हिन्दी के प्रसार एवं प्रचार में आपका योगदान सराहनीय है.

मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं.

नववर्ष में संकल्प लें कि आप नए लोगों को जोड़ेंगे एवं पुरानों को प्रोत्साहित करेंगे - यही हिंदी की सच्ची सेवा है।

निवेदन है कि नए लोगों को जोड़ें एवं पुरानों को प्रोत्साहित करें - यही हिंदी की सच्ची सेवा है।

वर्ष २०१० मे हर माह एक नया हिंदी चिट्ठा किसी नए व्यक्ति से भी शुरू करवाएँ और हिंदी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें।

आपका साधुवाद!!

नववर्ष की बहुत बधाई एवं अनेक शुभकामनाएँ!

समीर लाल
उड़न तश्तरी

AAKASH RAJ ने कहा…

संगीता जी, अगली कड़ी का इंतजार रहेगा .........
आपको नव वर्ष की ढेर सारी शुभकामनायें

खुशदीप सहगल ने कहा…

कल क्या होगा, किसको पता
अभी ज़िंदगी का ले लो मज़ा...

संगीता जी, अपना ये सिद्धांत है कि आज ही है जो हमारे हाथ में है...इसलिए कल जो बीत गया है, उससे सबक लेते हुए आने वाले कल को संवारने के लिए आज ही अपना सर्वोत्तम देने का प्रयास करना चाहिए...


नया साल आप और आपके परिवार के लिए असीम खुशियां लाए...

जय हिंद...

Popular India ने कहा…

Prakriti aisa kabhi nahin kar sakti hai ki pure duniyan ko purna rup se nashta ya samapt kar de. Main yah daawe ke saath kah sakta hun ki 2012 mein wah bhi log kuchh nishchit tithi kahte hain, us din duniyan purna rup se samapt nahin hogi. Prakriti aisa kabhi nahin kar saktee. Haan aisa kaha jaata hai ki varmaan samay ka yug Kaliyug wa Satyug ke bich ka Sangam Yug jarur hai. Par duniyaan purna rup se samapta nahin ho sakti.

Sabon kee shubhkamnaaon ke saath.

Aapka
mahesh kumar verma

अन्तर सोहिल ने कहा…

अगली कडी जल्दी पोस्ट कीजिये

प्रणाम

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

कल जो भी होगा देखा जाएगा ..पर फिर भी इन्तजार है अगली कड़ी का .सही कहा समय कम है जल्दी से लिखे :) नए साल की बहुत बहुत बधाई

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

जब चाहे तब आये कयामत हमें कोई दिक्कत नहीं है.

subodh dixit ने कहा…

माया कलेंडर एक एैसा विज्ञान है जो आधुनिक विज्ञान से समक्षना असंभव सा है । यह मात्र दिनो की गणना मानना वड़ी गलती और विषय से भटकना मात्र ही होगा

HANUMAN PRASAD SHARMA ने कहा…

संगीता जी आप के लेख का इंतजार है, लेकिन मै नही मानता कि यह सब होगा,सब एसे ही चलेगा जेसा अब चल रहा है बस कुछ उथल पुथल शायद हो, जो आम होती है भुकम्प के आने से बाड आने से