मंगलवार, 9 फ़रवरी 2010

बच्‍चों के मनोवैज्ञानिक विकास में बहुत ही सकारात्‍मक प्रभाव डालता है 'लग्‍नचंदा योग' !!

क्षेत्रीय भाषाओं में बहुत नाज नखरों से पालन पोषण होनेवाले दुलारे बच्‍चे को 'लगनचंदा बच्‍चा' कहा जाता है , किसी बच्‍चे की जिद को देखकर उसे डांटते हुए यह भी कहा जाता है कि तुम 'लगनचंदा' नहीं हो , जो तुम्‍हारी हर जरूरत पूरी हो जाएगी। इस शब्‍द के इतने लोकप्रिय होने के बावजूद आपमें से शायद ही कोई जानते होंगे कि 'लगनचंदा योग' का क्‍या मतलब है ? मैं अपने एक आलेख में पहले ही बता चुकी हूं कि ज्‍योतिष में आसमान के बारहों राशियों में से जिसका उदय बालक के जन्‍म के समय पूर्वी क्षितिज पर होता रहता है , उसे बालक का लग्‍न कहते हैं। अब इसी लग्‍न में यानि उदित होती राशि में च्रद्रमा की स्थिति हो , तो बालक की 'जन्‍मकुंडली' में लग्‍नचंदायोग बन जाता है , जिसे ही क्षेत्रीय भाषा में 'लगनचंदा योग' कहते हैं।

यदि संभावनावाद की दृष्टि से यहां भी विचार किया जाए , तो किसी भी कुंडली में बारह भाव होते हैं और किसी भी भाव में किसी ग्रह के बैठने की संभावना 1/12 होती है। इस हिसाब से लगनचंदा योग भी 12 में से एक बच्‍चे का होता है , यानि 8 प्रतिशत से अधिक बच्‍चे 'लगनचंदा योग ' में आ जाते हैं। पर हम इस वास्‍तविक दुनिया को देखेंगे , तो अहसास होगा कि 8 प्रतिशत बच्‍चों को मुंहमांगी मुराद पूरी नहीं होती है , तो इसका अर्थ क्‍या यह माना जाए कि इस योग में कोई सच्‍चाई नहीं !

नहीं, ऐसी बात नहीं है , 'लग्‍नचंदा योग' किसी भी व्‍यक्ति के बाल्‍यावस्‍था में बच्‍च्‍े के पालन पोषण के फलस्‍वरूप उसके मनोवैज्ञानिक विकास में बहुत ही सकारात्‍मक प्रभाव डालता है , लेकिन इसके लिए जन्‍मकुंडली में चंद्रमा की स्थिति को मजबूत होना चाहिए। यदि चंद्रमा मजबूत हो , तो बालक पर 'लग्‍नचंदा योग' का पूरा प्रभाव पडेगा , जबकि चंद्रमा कमजोर हो तो 'लग्‍नचंदा योग' के प्रभाव में बाधा दिखाई दे सकती है।

चंद्रमा की शक्ति का निर्णय हम उसके आकार के आधार पर कर सकते हैं। इस हिसाब से जब चंद्रमा अमावस्‍या के आसपास का हो , तो वह कमजोर होता है , जबकि पूर्णिमा के आसपास का हो , तो वह मजबूत होता है। कमजोर चंद्रमा लग्‍न में हो , तो बालक को  बुरा फल तथा मजबूत चंद्रमा लग्‍न में हो , तो बालक को अच्‍छा फल प्रदान करता है। सामान्‍य होने पर सामान्‍य ढंग का फल प्राप्‍त होता है।

मजबूत चंद्रमा के साथ का 'लग्‍नचंदा योग' मेष लग्‍नवालों के लिए माता का सुख , वृष लग्‍नवालों के लिए भाई बहनों का सुख , मिथुन लग्‍नवालों के लिए धन का सुख , कर्क लग्‍नवालों के लिए स्‍वास्‍थ्‍य का सुख , सिंह लग्‍नवालों के लिए खर्च का सुख , कन्‍या लग्‍न वालों के लिए लाभ का सुख , तुला लग्‍नवालों के लिए पिता का सुख , वृश्चिक लग्‍नवालों के लिए भाग्‍य का सुख , धनु लग्‍नवालों के लिए जीवन शैली का सुख , मकर लग्‍नवालों के लिए घरेलू मामलों का सुख , कुंभ लग्‍नवालों के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता का सुख तथा मीन लग्‍नवालों के लिए आई क्‍यू की बढोत्‍तरी का सुख भरपूर मात्रा में प्रदान करता है , जबकि कमजोर चंद्रमा के साथ का 'लग्‍नचंदा योग' इन सुखों में कमी का अहसास देता है।

अच्‍छे 'लग्‍नचंदा योग' के साथ यदि षष्‍ठ भाव में अधिकांश ग्रहों की स्थिति हो तो इस योग का प्रभाव और अधिक पडता है। ऐसे बच्‍चे शरीर से स्‍वस्‍थ , अपने मा पिताजी और परिवार वालों के लाडले , हर प्रकार की सुख सुविधा में जीवन यापन करने वाले होते हैं। उनके बचपन में पालन पोषण के वक्‍त लाड प्‍यार का क्‍या कहना ??


9 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

लगनचंदा-शायद हम भी अम्मा की नजर में लगनचंदा ही रहे होंगे. :)

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

यह भी अनोखा योग है?

निर्मला कपिला ने कहा…

बहुत अच्छी जानकारी है धन्यवाद्

महफूज़ अली ने कहा…

वृश्चिक लग्‍नवालों के लिए भाग्‍य का सुख .......

मैं खुश हूँ..... अब तक के आपने जो भी कहा है मेरे लिए.....सही और सच हुआ है......

कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee ने कहा…

mere to lagna Chandrma hai hi, Mithun rashi hai, ab 6th mein kya hai, yah pata karna hoga.

Ashish ने कहा…

माफ़ कीजियेगा संगीता जी पर जब गजकेसरी योग की बात चली थी और मैंने एक किताब से उदाहरण दिया था की ग्रहों की शक्ति होनी चाहिए तब आपने बजाय विषय के सिर्फ ये कहा था आपने बहोत शोध किया है

आज आप खुद कह रहीं हैं की गृह में शक्ति हो तो योग का फर्क पड़ता है

ये टिपण्णी अगर पिछली कुछ टिप्पणियों की तरह प्रकाशित ही ना करें तो कोई बात नहीं पर आपको बहोत आत्मावलोकन की जरूरत है

शायद रजनीश जी की बातों मैं कुछ हद तक सच्चाई है| मैं बहोत खेद के साथ विदा लेता हूँ

संगीता पुरी ने कहा…

आशीष जी,
मै जो भी लिखा करती हूं .. वो बहुत वर्षो के मेरे और पिताजी के द्वारा किए गए शोध का परिणाम है .. पर मैं अपनी बातें मनवाने को किसी को मजबूर नहीं कर सकती .. जिसे विश्‍वास हो वही तो मेरी बातों को मान सकता है .. पर मैं अपने आलेखों पर दिए गए किसी भ्‍ी टिप्‍पणी को आज तक नहीं रोका है .. क्‍यूंकि उससे टिप्‍पणी देनेवालों की मानसिकता का पता चलता है मेरा नहीं .. हां बेनामी लोगों के टिप्‍पणी देने का ऑप्‍शन मैने अवश्‍य बंद रखा है .. किसी प्रकार के सकारात्‍मक तर्क से मैं कभी नहीं डरती .. इसलिए आपका यह इल्‍जाम लगाना बहुत गलत है ....

ये टिपण्णी अगर पिछली कुछ टिप्पणियों की तरह प्रकाशित ही ना करें तो कोई बात नहीं पर आपको बहोत आत्मावलोकन की जरूरत है

Dr Satyajit Sahu ने कहा…

संगीता जी आपके लेख में ज्योतिष के जानकार ही आनंद ले सकते है
यह संगीत की बारीकी का आनंद लेने जैसा है
आप जो भी लिखती है वो ज्योतिष और समाज के लिया अच्छा है
लगन्चंदा योग तो बहुत विशेष है ही

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

संगीता जी मैं और मेरी दीदी लगनचंदा योग में पैदा हुए या नही यह तो मै नही जानती, पर मैं पूर्मिमा को पैदा हुई और वह अमावस के एक दिन पहले । और हमारी किस्मत में भी उतना ही फर्क रहा । उसका जीवन काफी कष्टमय रहा और मेरा तुलनात्मक दृष्टी से
आसान ।