शनिवार, 17 जुलाई 2010

18 जुलाई से 4 अगस्‍त तक बहुत अच्‍छी बारिश नहीं हो पाएगी !!

जब से मैने चिट्ठा लिखना शुरू किया है , 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' की दृष्टि से ग्रहों के आधार पर जो आनेवाला मौसम होना चाहिए , उसके बारे में मैं अक्‍सर आलेख लिखा करती हूं। वैसे नियमित तौर पर पढनेवाले पाठक ही समझते होंगे कि मेरा आकलन कितना सही रहता है। 29 मार्च को पोस्‍ट किए गए अपने आलेख में ही मैने लिखा था कि 24 जून के तुरंत बाद शुभ ग्रहों का प्रभाव आरंभ होगा , जिसके कारण बादल बनने और बारिश होने की शुरूआत हो सकती है , यदि नहीं तो कम से कम मौसम खुशनुमा बना रह सकता है। हमारी गणना के अनुरूप ही 24 जून के बाद ही आसमान में बादल दिखाई देने लगें तथा यत्र तत्र बारिश के छींटे पडने लगे। जुलाई के पहले और दूसरे सप्‍ताह में पूरे भारतवर्ष में थोडी बहुत बारिश होती ही रही। 


वैसे तो उस आलेख में मैने यह भी लिख दिया था कि इस वर्ष यानि 2010 में मौसम की सबसे अधिक बारिश 4 अगस्‍त के आसपास से शुरू होकर 19 सितम्‍बर के आसपास तक होगी। यह समय पूर्ण तौर पर खेती का है , इसलिए इस वर्ष किसानों को अवश्‍य राहत मिलनी चाहिए। लेकिन इतना स्‍पष्‍ट न कर सकी थी कि 4 अगस्‍त से पहले के पंद्रह बीस दिन बहुत अच्‍छी बारिश के नहीं होंगे। आप पाठकों को यह जानकर थोडा कष्‍ट पहुंचेगा कि 18 जुलाई के पहले के मौसम की तुलना में 18 जुलाई के बाद का मौसम कुछ कष्‍टकर दिख रहा है। 30 जुलाई को आसमान में बनने वाले अशुभ ग्रहों की खास स्थिति और उनकी गत्‍यात्‍मक शक्ति के कारण इस योग के 12 दिन पूर्व और पश्‍चात् मौसम गर्म हो सकता है। इसलिए 18 जुलाई से 12 अगस्‍त के आसपास तक बादल छितराए होंगे और बहुत अच्‍छी बारिश नहीं हो पाएगी। 


लेकिन चूंकि भारतवर्ष के लिए यह मौसम पूर्ण तौर पर बारिश का है , इसलिए 17 , 18 , 23 , 24 , 25 , 31 जुलाई और 1 या 2 अगस्‍त को खासग्रहयोग के कारण यत्र तत्र बारिश होती रहेगी और उसके कारण अन्‍य स्‍थानों का भी वातावरण सुखद दिखाई पडेगा , पर कुल मिलाकर बारिश इतनी भी नहीं होगी , जो कृषि या अन्‍य जरूरतों के लिए जल की पूर्ति कर सके। खासकर जहां फसलों की रोपाई जुलाई में ही होती है , वहां अधिक मुसीबत आएगी। भला का बरखा जब कृषि सुखाने ??


पर खुशी की खबर ये है कि 6 और 7 अगस्‍त को आसमान में शुभ ग्रहों की स्थिति बन रही है , जिसके कारण 4 अगस्‍त के बाद बारिश की प्रचुरता होनी चाहिए , जिससे अगस्‍त में रोपाई होने वाले स्‍थानों पर किसानों को राहत मिल सकेगी। यह ग्रहयोग अशुभ ग्रहों के योग के प्रभाव को कुछ कम कर सकता है। जैसा कि मैने पहले भी अपने आलेखों में लिखा है , 4 अगस्‍त से लेकर 19 सितंबर तक प्रचुर मात्रा में बारिश होगी , पर प्राकृतिक असंतुलन के मध्‍य इस बारिश का हर स्‍थान पर बंटवारा सही होगा , इसपर कुछ संदेह तो रह ही जाता है। लेकिन इस मध्‍य अधिकांश स्‍थानों पर बारिश की कमी नहीं होनी चाहिए। इस तरह खेतों में पानी के लिए अभी किसानों को कुछ और इंतजार करना पड सकता है। 

14 टिप्‍पणियां:

अजय कुमार ने कहा…

इस साल अच्छी बारिश नही होगी ??

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

देख लेते है!
--
15 दिनों में ही सत्यता का आकलन हो जायेगा!

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर जानकारी, हम ने देखा है आप की भाविष्या बाणी पहले भी सत्य निकली है, चलिये किसानो का भला हो, ओर मंहगाई कम हो गी तभी

vinay ने कहा…

आरम्भ से ही देख रहा हूँ,आपकी भविष्यवाणीयों का
सही ही निकलतीं हैं ।

मनोज कुमार ने कहा…

अच्छा आलेख।

डॉ टी एस दराल ने कहा…

चलिए अभी खाली बादल देखकर ही खुश हो लेते हैं ।

ललित शर्मा ने कहा…

तब तो मान लो जी,इस साल अकाल पड़ेगा।
सरकार को अभी से तैयारी कर लेनी चाहिए।

मस्त रहो मस्ती में,आग लगे बस्ती में

मर्द को दर्द,श्रेष्ठता का पैमाना,पुरुष दिवस,एक त्यौहार-यहाँ भी आएं

दीपक ने कहा…

namste didi aapki bhavishya vani pahile bhi sahi hui hai...thank for information

प्रवीण शाह ने कहा…

.
.
.
आदरणीय संगीता जी,

अब क्या कहूँ इस आलेख के बारे में... आप बोकारो में रहती हैं और पाठक रहते हैं पूरे देश में...मौसम के हिसाब से ३६ सबडिवीजन में बंटा है यह महादेश...अभी तक २३/३६ सबडिवीजन में बारिश सामान्य या सामान्य से ज्यादा हुई है...और यह है बारिश की स्थिति

यहाँ भी देखिये कितनी हुई बारिश...

आप गत्यात्मक ज्योतिष के आधार पर भविष्यवाणी कर रही हैं, अच्छा है पर यह भविष्यवाणी है किस जगह के लिये ?... बताइये तभी तो सत्यता परखी जायेगी...
आशा है आप समझेंगी व अन्यथा न लेंगी...

आभार!


...

संगीता पुरी ने कहा…

प्रवीण शाह जी,
बेमतलब विरोध करने की आपकी आदत बनती जा रही है .. मैं अभी 18 जुलाई से 4 अगस्‍त की बात कर रही हूं .. और आप मुझे 18 जुलाई तक की रिपोर्ट दिखा रहे हैं .. 24 जून से शुभ ग्रहों को प्रभाव मैने भी लिखा था !!

संगीता पुरी ने कहा…

प्रवीण शाह जी ,
कहां से आप इतने आंकडे लाते हैं .. क्‍या वहां से यह भी पता किया जा सकता है कि .. 3 जुलाई के आसपास जिस ग्रहस्थिति की मैने इस आलेख में चर्चा की थी .. उस दिन के आसपास पूरे भारतवर्ष में कितनी बारिश हुइ थी .. मैं आपके आंकडों का इंतजार करती रह गयी .. पर आप लेकर नहीं आए !!

प्रवीण शाह ने कहा…

.
.
.
आदरणीय संगीता जी,

मेरे सवाल सीधे और स्पष्ट हैं:-

१- १८ जुलाई से ४ अगस्त तक 'बहुत अच्छी' बारिश न हो पाने की जो भविष्यवाणी आप कर रही हैं वह ३६ में से कौन-कौन से सबडिवीजन के लिये है?

२- सामान्य से कितने प्रतिशत कम को आप 'कम' मानेंगी...क्योंकि सामान्य से -२०% से ज्यादा डिपार्चर को ही मानक के अनुसार Deficient rain कहा जा सकता है ।

आभार!

संगीता पुरी ने कहा…

गर्मी के दिनों में शुभ ग्रहों के प्रभाव का अर्थ हुआ कहीं बारिश होगी और उसके हिसाब से कहीं मौसम सुहावना रहेगा .. गर्मी कम पडने से कुछ राहत मिल जाएगी .. भला तटवर्ती प्रदेशों और दक्षिण के कुछ भागों को छोडकर, जहां लगभग वर्षभर बरिश होती है .. शुभ ग्रहों की दृष्टि की आवश्‍यकता क्‍यू ??
शुभ ग्रहों के हिसाब से मानसूनी बारिश पर खेती निर्भर रहनेवाले अधिकांश स्‍थानों को बारिश के क्षेत्र माना जा सकता है .. भारतवर्ष के अन्‍य क्षेत्रों को भी लिया जा सकता है .. खासकर जब अधिक बारिश की संभावने बने .. जैसा कि मैने 4 अगस्‍त के बाद होने की उम्‍मीद जतायी है .. भारत के अधिकांश प्रदेशों में नियमित बारिश होगी .. खासकर सितम्‍बर के पहले सप्‍ताह में तो बारिश के कारण यत्र तत्र जनजीवन अस्‍त व्‍यस्‍त हो जाएगा .. हां तिथि को लेकर मैं जितनी निश्चिंत रहती हूं .. क्षेत्र को लेकर नहीं हो पाती .. अभी बहुत शोध की आवश्‍यकता है !!

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

भविष्यवाणी सच साबित होती दिखाई दे रही है ..