रविवार, 11 जुलाई 2010

विश्‍वकप के बारे में ऑक्‍टोपस द्वारा सटीक भविष्‍यवाणी का कारण क्‍या हो सकता है ??

मैने जब से ब्‍लॉग लिखना शुरू किया है , हर चर्चित मुद्दे पर , चाहे वो मौसम हो या राजनीति , खेल हो या कोई बीमारी , कुछ न कुछ भविष्‍यवाणियां करती आ रही हूं । आकलन में कितनी सत्‍यता होती है , वो तो हमारे पाठक ही बता सकते हैं , पर मैं तुक्‍का नहीं लगाती , एक निश्चित आधार होने पर ही भविष्‍यवाणियां करती हूं। यदि ऐसा नहीं होता तो विश्‍वकप फुटबॉल के बारे में मैं भविष्‍यवाणियां कर चुकी होती। अनिश्चितता के माहौल में इस प्रकार के आकलन का कुछ तो महत्‍व है ही ,  शायद यही कारण हो कि कल के पोस्‍ट पर शिक्षामित्र ने टिप्‍पणी कर पूछा कि क्या आप विश्वकप फुटबाल के बारे में कोई भविष्यवाणी करना चाहेंगी?

पहले भी कुछ पाठकों के मेल आने पर मैने विश्‍वकप फुटबॉल के बारे में जानकारी के लिए गणना करनी शुरू की थी। पर उस गणना से कुछ साफ तस्‍वीर नजर नहीं आ सकी और इसलिए मैने इसके बारे में कुछ भी नहीं लिखा। लेकिन मेरी या अन्‍य ज्‍योतिषियों की कमी ऑक्‍टोपस ने कर दी और अपनी सटीक हो रही भविष्‍यवाणियों के कारण वह दुनियाभर का हीरो बना हुआ है। जहां ज्‍योतिष के इतने सारे तथ्‍यों को ध्‍यान में रखते हुए एक एक भविष्‍यवाणियां करने में इतनी मुश्किलें आती है , खेलते कूदते ऑक्‍टोपस बाबा एक डब्‍बे पर बैठकर आसानी से भविष्‍यवाणी कर रहे हैं। 

इस घटना को सुनने के बाद मेरा ध्‍यान बहुत पुरानी कुछ घटनाओं पर गया, जहां किसी दुविधा की स्थिति में हाथ की दो उंगलियों में दो परिणामों को रखते हुए उन्‍हें आगे कर किसी बच्‍चे को उनमें से एक पकडने को कहा जाता था। मान्‍यता है कि बच्‍चे दिल के सच्‍चे होते हैं , इस कारण वे जो भी उंगली पकडेंगे , आनेवाला निर्णय वास्‍तव में वैसा ही आएगा। यह संयोग ही है कि अधिकांश समय बच्‍चे के द्वारा पकडी गयी उंगली वाला परिणाम ही देखने को मिलता था। जिस बच्‍चे के द्वारा पकडी गयी उंगली का अनुमान अधिक सही होगा , परिवार य समाज में उसे भाग्‍यशाली माना जाएगा ही। आखिर ईश्‍वर की विशेष कृपा होने से ही तो वह सही उंगली को पकड पाता था।

एक बार मेरे छोटे बेटे की तबियत बहुत गडबड थी , अस्‍पताल में मेरे बेटे का इलाज चल रहा था और मैं मायके में थी। मेरा भतीजा तब बहुत छोटा था , लेकिन उसकी मम्‍मी ने कहा कि उसकी ओर दो उंगलियां बढाएं , वह बिल्‍कुल सही उंगली पकडेगा। मैं इन सब बातों को नहीं मानती हूं , ग्रहों के हिसाब से मैने जो गणना की थी , उसके हिसाब से 18 तारीख तक का डेट सेंसिटीव था , कोई बुरी खबर भी मिल सकती थी , पर यदि जांच पडताल के क्रम में ही वो डेट टल जाए , तो स्थिति बिगडने वाली नहीं होगी। पर 19 तारीख में दस दिन की देर थी , इसलिए सबका मन घबडाया हुआ था। बच्‍चे की मम्‍मी ने ही अपने हाथ की दोनो उंगलियां उसकी ओर बढाया , जिसमें से उसने एक को पकडा। उसने बहुत खुश होते हुए मुझे बताया कि बेटा दवा से ही ठीक हो जाएगा , ऑपरेशन की आवश्‍यकता नहीं पडेगी। दस दिनों तक चेकअप चलता रहा और कई डॉक्‍टरों ने संयुक्‍त रूप से मिलकर फैसला किया कि ऑपरेशन की आवश्‍यकता नहीं है , दवा से ही ठीक हो जाएगा। आप सबों को जानकर ताज्‍जुब होगा कि यह परिणाम 19 तारीख को आया।

दो ऑप्‍शनों में से एक को चुनने के बाद उसका सही होने का सबसे बडा कारण लोगों का विश्‍वास होता है। प्रकृति के नियमों को समझना सरल नहीं , पर किसी बात पर आप पूरा विश्‍वास रखो , तो उस घटना के सही होने के चांसेज बढ जाते हैं। यही कारण है कि किसी के जीवन में एक बार सफलता की शुरूआत होती है , तो आत्‍मविश्‍वास बढता है और उसके साथ ही साथ सफलताओं का इतिहास बनता जाता है। इसके विपरीत यदि किसी के जीवन में असफलता की शुरूआत होती है , तो आत्‍मविश्‍वास घटता है और वह कई असफलताओं को जन्‍म देता है। आत्‍मविश्‍वास के कारण ही कभी कभी मनुष्‍य में एक छठी इंद्रिय भी काम करती है और आनेवाली घटनाओं को वह पहले से देखने लगता है।

मेरे ख्‍याल से ऑक्‍टोपस के द्वारा इस प्रकार की भविष्‍यवाणियों के सटीक होने में एक ओर उसके और उसके मालिकों के भाग्‍य का खेल है , तो दूसरी ओर लोगों का विश्‍वास भी काम कर रहा है।लेकिन इस प्रकार संकेत में प्राप्‍त की गयी भविष्‍यवाणियों का कोई आधार नहीं होता , भाग्‍य के साथ देने से कभी लगातार भी कई भविष्‍यवाणियां सही हो सकती है , जबकि भाग्‍य न साथ दे तो एक भी सही न हो। वास्‍तव में इस प्रकार की भविष्‍यवाणियां एक प्रकार का तुक्‍का है , इसलिए इसके बारे में दावे से कुछ नहीं कहा जा सकता। अल्‍पावधि भविष्‍यवाणियों के मामलों में इस प्रकार की घटना कितनी भी लोकलुभावन क्‍यूं न हों , पर दीर्घावधि भविष्‍यवाणियों के लिए इनका कोई महत्‍व नहीं , क्‍यूंकि किसी का भाग्‍य हर वक्‍त तो साथ नहीं दे सकता। वैसे जो भी हो , जिन भविष्‍यवाणियों को करने के लिए हमें गणनाओं का ओर छोर भी न मिल रहा हो , उसे आसानी से बता देने के लिए ऑक्‍टोपस और उनके मालिक को बधाई तो दी ही जा सकती है।

23 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

मात्र ५०/५० का खेल है...चार पांच के बीच चुनना होता तो अब तक सोलह टांगे हो गई होती पॉल बाबा की. :)

ललित शर्मा ने कहा…

संकेत में प्राप्‍त की गयी भविष्‍यवाणियों का कोई आधार नहीं होता।

आधारहीन भविष्यवाणी का कोई तुक नहीं है।

ये सब सटोरियों की मौज के लिए हो रहा है।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

सारी भविष्यवाणियाँ तुक्का ही होती हैं।

Vivek Rastogi ने कहा…

सच्चे मन से की गई कोई भी चीज बिल्कुल सही होती है।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सच है की विश्वास से आत्मविश्वास बढ़ता है....और सकारात्मक सोच से नकारात्मक भाव कम होते जाते हैं

P.N. Subramanian ने कहा…

अपना अपना विश्वास है बस.

डॉ टी एस दराल ने कहा…

ऑक्टोपस के बारे में क्या कहें ?
विकसित समाज भी इन बातों को बढ़ावा दे रहा है ।

राज भाटिय़ा ने कहा…

अजी तुक्का हो या ना हो हमारे अक्टॊपुस बाबा दुनिया मै सब से प्रसिद्ध हो गये, हीरो बन गये, बाकी आप की बात सोला आने सही है कि यह एक तुक्का ही है

प्रवीण शाह ने कहा…

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सारी भविष्यवाणियाँ तुक्का ही होती हैं।

आदरणीय दिनेशराय द्विवेदी जी सही कह रहे हैं।

किसी भी पद्धति से पूर्ण निश्चितता के साथ भविष्य-कथन असंभव है!

आभार!


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Murari Pareek ने कहा…

किसी बात के सच होने में जो आत्मविश्वास वाली बात है उससे तो मैं शत प्रतिशत सहमत हूँ ! कई बार नहीं कई कई बार में देख चूका हूँ ! कई बार दोस्तों के साथ क्रिकेट देखते हुए किसी को आउट होने की भविष्यवाणी वो भी निर्धारित बोलों में जैसे की मैंने कह दिया ये तीन बोल में आउट हो जाएगा !! तो सचमुच ऐसा होता था! आप विस्वास करें न करें मेरे दोस्त मुझे सचमुच मानते हैं की मेरी ६थि इन्द्रिय कम करती है !पर दरअसल में तो उनका विस्वास कम karta है !!

Arvind Mishra ने कहा…

उँगलियों वाला टाईम टेस्टेड है :)

Suresh Chiplunkar ने कहा…

संगीता जी, ऑक्टोपस बाबा "झण्डे के रंग" से कितने प्रभावित होते हैं यह भी शोध का विषय है… जो 6 बार तो जर्मनी के झण्डे पर बैठे, लेकिन फ़िर स्पेन के झण्डे पर बैठ गये, और फ़ाइनल में भी स्पेन के झण्डे पर ही बैठे…।

यदि स्पेन जीतता है तो लोग और अंधविश्वासी हो जायेंगे, जबकि नीदरलैण्ड जीतता है तो ऑक्टोपस बाबा की आँखों का चेक-अप करना पड़ेगा कि कहीं उसे विशेष रंग तो पसन्द नहीं है? :) :)

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सही हो गई तो तीर,
नही तो तुक्का!

प्रकाश गोविन्द ने कहा…

एक ही प्रोफेशन के दो लोगों में जेलिसी होना स्वाभाविक है :)
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कृपया अफवाह ना फैलाएं
आपको भले ना हो
मुझे तो अगाढ़ विश्वास है आक्टोपस बाबा पर
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शीघ्र ही उनका मंदिर भी स्थापित होगा
आप सब यथाशक्ति सहयोग करें

महफूज़ अली ने कहा…

मुझे तो यह चांस की बात लगती है...

गिरिजेश राव ने कहा…

ऑक्टोपस की आखिरी बात भी सच - स्पेन विश्व चैम्पियन। ग़जब संयोग है। चिपलूनकर जी की बात में दम है। रंगों को लेकर ऑक्टोपसों के व्यवहार की पड़ताल होनी चाहिए।
वैसे तमाम भविष्यवाणियों की तरह यह भी तुक्का ही है।

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

ये हमारा आत्मविश्वास ही होता है जो हमारी बात को सच साबित करता है । ऑक्टोपस बाबा की भविष्यवाणी तो सच में 50/50 का खेल है ।

कुमार राधारमण ने कहा…

अब तक पूर्वी देशों को ही अंधविश्वास का गढ़ माना जाता था। मगर आक्टोपस के कारण शायद पश्चिम में ज्योतिष के प्रति विश्वास पुख्ता करने में कुछ मदद मिले।

soni garg ने कहा…

आप मेरे ब्लॉग पर आई मुझे हार्दिक प्रसन्नता हुई लेकिन मैडम, मैं आज कि अपनी पोस्ट पर आपकी राय थोडा खुल कर चाहती हूँ क्योकि आज कि पोस्ट पर आने वाली सभी प्रतिक्रियाये रेहान भाई तक पहुंचाई जाएँगी ! उम्मीद है आप रेहान भाई के इस अनोके अन्धविश्वास को दूर करने मैं मेरी मदद करेंगी !

वीना ने कहा…

सारा गणित का खेल है। जरा सी चूक गड़बड़ कर सकती है लेकिन आक्टोपस मशहूर अवश्य हो गए।

वीना ने कहा…

सारा गणित का खेल है। जरा सी चूक गड़बड़ कर सकती है लेकिन आक्टोपस मशहूर अवश्य हो गए।

hem pandey ने कहा…

आक्टोपस द्वारा भविष्यवाणी किया जाना तो तर्क संगत नहीं लगता.लेकिन सारी भविष्यवाणियों को तुक्का करार देना अतार्किक और पूर्वाग्रही सोच है.मौसम विभाग की अधिकांश भविष्यवाणियाँ गलत हो जाती हैं. लेकिन वे तुक्का नहीं हैं. ज्योतिष की भविष्यवाणियाँ भी सही या गलत होती हैं .वे गणना पर आधारित होती हैं. तुक्का नहीं होतीं.

Vinod Ranka ने कहा…

Bahoot achhe sangita ji aap ke lekhan ki kala or samjhane ki kala kamal ki hain badhai meri taraf se aap ko or octopus ko :)