बुधवार, 29 सितंबर 2010

हैती के बाद नवंबर 2010 के मध्‍य में एक और बडे भूकम्‍प की आशंका

मेरे पुराने पाठकों में से सबों को 11 जनवरी का एक आलेख याद ही होगा , जिसमें मैने 16 जनवरी को एक बडे भूकम्‍प के आने की आशंका जतायी थी , इसपर बहुत पाठकों ने सोंचा था कि मैं प्रतिदिन आनेवाली भूकम्‍प की घटना को ग्रहों का प्रभाव सिद्ध करने की बेमतलब कोशिश कर रही हूं,पर इसी दिन हैती में आए भूकम्‍प ने मेरा साथ देकर ग्रहों के पृथ्‍वी पर पडनेवाले प्रभाव को साबित कर दिया था। 200 साल के सबसे भयंकर भूकंप में कैरेबियाई देश हैती में हजारों लोग मलबे के नीचे दब गए थे। भूकंप में हैती का राष्ट्रपति भवन भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। संयुक्त राष्ट्र के पीसकीपर का हेड क्वार्टर, नेशनल पैलेस(राष्ट्रपति भवन ), एक अस्पताल और कुछ महत्वपूर्ण बिल्डिंग इस भूकंप में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई थी। 

दो तीन वर्षों के ब्‍लॉग लेखन में मौसम को लेकर मैं तो अक्‍सर भविष्‍यवाणियां करती रहती हूं , पर भूकम्‍प को लेकर मेरे द्वारा यह पहली भविष्‍यवाणी की गयी थी , जिसके तिथि और समय के निर्धारण में तो मुझे पूरी कामयाबी मिली थी , पर स्‍थान के बारे में मेरी गणना में चूक रह गयी थी। इस घटना पर ब्‍लॉग जगत का पूरा ध्‍यान गया था और चार दिनों तक हमारी बहस भी चली थी। जहां कुछ ने मेरी भविष्‍यवाणी को सही मानते हुए मुझे और सटीकता के साथ भविष्‍यवाणी करने के लिए शुभकामनाएं दी थी , वहीं कुछ पाठकों ने भूकम्‍प के बारे में मेरे स्‍थान की कमजोरी को दिखाते हुए और इस भविष्‍यवाणी की सार्थकता के बारे में प्रश्‍न भी किया था। 

वास्‍तव मे इतने बडे ब्रह्मांड में आकाशीय पिंडों की खास खास स्थिति , उनके मध्‍य खास कोणिक दूरी से पृथ्‍वी पर कुछ विशेष प्रकार की घटनाओं का अंदाजा लगता है। पृथ्‍वी पर होनेवाली हलचल का पूरा संबंध ब्रह्मांड में ग्रहों की खास स्थिति से है, इसलिए इसके आकलन में दिक्‍कत नहीं आती , साथ ही सटीकता बनी रहती है। पर जहां तक पृथ्‍वी के खास भाग के प्रभावित होने का प्रश्‍न है , हमें कामयाबी नहीं मिल पाती। 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के नियमों की माने तो 2010 में ही आनेवाले समय में एक और बडे भूकम्‍प की आशंका नजर आ रही है , नवंबर के मध्‍य में आसमान में मौजूद ग्रहीय स्थिति पृथ्‍वी पर एक बडे भूकम्‍प की जबाबदेह हो सकती है। इस भूकम्‍प में बडे पैमाने पर नुकसान की भी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

नवंबर के मध्‍य में भूकम्‍प की संभावना की खास तिथि , समय और स्‍थान की चर्चा करते हुए इसपर और विस्‍तार से जानकारी देते हुए एक पोस्‍ट नवम्‍बर के प्रथम सप्‍ताह में लिखने की कोशिश करूंगी। हालांकि मैने पहले भी स्‍पष्‍ट किया है कि जितनी सटीकता से किसी घटना की तिथि और समय की जानकारी दी जा सकती है , उतनी सटीकता घटना के स्‍थान में नहीं हो सकती है। इसकी वजह पृथ्‍वी की इतनी तेज गति मानी जा सकती है , दैनिक गति के कारण पृथ्‍वी 1669 किमी प्रतिघंटे के रफ्तार से चलती है। इसके अलावे वार्षिक गति के कारण प्रतिघंटे 108,000 किमी की दूरी पार करती है , जिसके कारण इसका कौन सा भाग कब कहां और कैसे गुजर जाता है , इसका अंदाजा लगाना हम जैसे संसाधन विहीनों लिए काफी मुश्किल होता है। लेकिन फिर भी मैं अपनी पूरी जानकारी से स्‍थान का पता लगाने की कोशिश कर रही हूं।

वैसे मोटा मोटी तौर पर मेरे द्वारा अबतक जो गणना हुई है , उसमें भारतवर्ष के आक्षांस और देशांतर का स्‍थान किसी भी कोण से नहीं आ रहा है। फिर भी भूगर्भशास्त्रियों से उम्‍मीद रखूंगी कि वो इसका ध्‍यान रखे। प्रकृति अचानक किसी भी घटना को अंजाम नहीं देती , किसी प्रकार की दुर्घटना से पहले वह बारंबार किसी न किसी प्रकार का संकेत दिया करती है। पर हम मनुष्‍य उसके संकेत को नहीं समझते और अंत में अनिष्‍ट हो ही जाया करता है। यदि पृथ्‍वी के किसी भाग में नवंबर के मध्‍य में एक बडा भूकम्‍प आना है , तो उस भाग में आनेवाले डेढ महीने के अंदर भूगर्भ शास्त्रियों को हलचल तो अवश्‍य दिखाई पडेगा , आवश्‍यकता है इस बात पर ध्‍यान देने की , ताकि उस क्षेत्र के कम से कम लोगों को नुकसान पहुंच सके। वैसे मैं अभी भी इस बात के लिए अध्‍ययनरत हूं कि इस बारे में मुझे अधिक से अधिक जानकारी मिल सके।

18 टिप्‍पणियां:

डॉ टी एस दराल ने कहा…

खुदा खैर करे । भूकंप से पल में सब मिट जाता है ।

dhiru singh {धीरू सिंह} ने कहा…

भूभर्ग वैग्यानिक तो भूकम्प के बाद सिर्फ़ यही बता पाते है वह कितने रियक्टल स्केल पर था .

वन्दना ने कहा…

आपकी भविष्यवाणी तो ज्यादातर सही होती हैं।

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

नवम्बर की प्रतीक्षा करेंगे... यह भी अच्छी जानकारी है की भारत का कोई भी सिरा इसके कोण में नहीं आ रहा है ... भविष्य के लिए सचेत करती भविष्यवाणी ... आभार

Bunty ने कहा…

एक और चोरी ..... जरुर पढ़े अच्छी जानकारी है ..
दरअसल आप ही की है ....
http://chorikablog.blogspot.com/2010/09/blog-post_1426.html

क्रिएटिव मंच-Creative Manch ने कहा…

कल जो भूकंप आने वाला है उसके बारे में आपने कुछ भी नहीं कहा :)

निर्मला कपिला ने कहा…

संगीता जी इस बार तो चाहती हूँ कि आपकी भविष्यवाणी गलत हो जाये पर भुकम्प ना आये। डर लगता है। धन्यवाद इस जानकारी के लिये।

राज भाटिय़ा ने कहा…

संगीता जी, काश इन बातो का पता ओत स्थान का पता कुछ दिन पहले लग जाये तो बहुत जाने बच सकती है, क्योकि होनी तो टल नही सकती, मेरे बच्चे आप की पोस्ट की बाते सुन कर बहुत हेरान होते है,

मनोज कुमार ने कहा…

भविष्य के लिए सचेत करती भविष्यवाणी!
बहुत अच्छी प्रस्तुति।
देसिल बयना-नदी में नदी एक सुरसरी और सब डबरे, करण समस्तीपुरी की लेखनी से, “मनोज” पर, पढिए!

'उदय' ने कहा…

...yah aashaa hai ki aap samay poorv hi sthaan v samay ki jaankaaree ko sahee tarah se anumaanit karlen ... taaki honee-anhonee se bachane kaa prayaas kiyaa jaa sake ... aabhaar !!!

राजभाषा हिंदी ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति। भारतीय एकता के लक्ष्य का साधन हिंदी भाषा का प्रचार है!
मध्यकालीन भारत धार्मिक सहनशीलता का काल, मनोज कुमार,द्वारा राजभाषा पर पधारें

vinay ने कहा…

आपकी भविष्यवाणी सही तो होती है,लेकिन भुकम्प ना आये तो अच्छा है ।

शिवम् मिश्रा ने कहा…


बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

प्रवीण शाह ने कहा…

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आदरणीय संगीता जी,

हमारी पृथ्वी के गर्भ (भूगर्भ) में अनेकों हलचलें चलती रहती हैं हरदम, भूकंपों का आना उन ही प्रक्रियाओं का परिणाम है ।

छोटे-मोटे भूकंप तो रोजाना ही आतें हैं पृथ्वी पर कहीं न कहीं...

पाठक और आप भी यहाँ पर... देख सकते हैं कि ५ फरवरी २०१० से आज तक के २३५ दिनों में रिचटर स्केल पर ६.० से ज्यादा तीव्रता के १०० भूकंप आये हैं, जिनमें से ३१ में जनहानि भी हुई है, यानी लगभग हर तीन दिन में एक भूकंप आया।

अपने देश भारत की बात करें तो विगत दस वर्षों में ६.० से अधिक तीव्रता के चौबीस भूकंप आ चुके हैं जिसमें छह में जनहानि हुई है।

तो नवंबर का महीना कोई अपवाद तो रहेगा नहीं...६.० से अधिक तीव्रता के एकाधिक भूकंप उस महीने में भी आयेंगे ही...हाँ हो सकता है कि आप भारी जान-माल की क्षति की भविष्यवाणी कर रही हैं... :(

आभार!


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arganikbhagyoday ने कहा…

din hai to rat bhi hogi, nirman hoga to bidhwansh bhi hoga ,dukh hai to sukh bhi hoga yah atal saty hai jo hona hai hota rahega isi ka nam khubasurat prakriti hai
arganikbhagyoday.blogspot.com

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
चक्रव्यूह से आगे, आंच पर अनुपमा पाठक की कविता की समीक्षा, आचार्य परशुराम राय, द्वारा “मनोज” पर, पढिए!

cmpershad ने कहा…

‘ उसमें भारतवर्ष के आक्षांस और देशांतर का स्‍थान किसी भी कोण से नहीं आ रहा है।’
आप की भविष्यवाणी का यह अंश सही निकले... वैसे ही देश सैलाब और सूखे के बीच फंसा हुआ है :(

ZEAL ने कहा…

भविष्य के लिए सचेत करती भविष्यवाणी---आभार