सोमवार, 27 सितंबर 2010

बुरे समय का इलाज ... संगीता पुरी

जहां जीवन में अच्‍छे ग्रहों के कारण सुखमय समय जीवन को आनंदमय बनाए रहते हैं , वहीं बुरे ग्रहों के कारण चलने वाले बुरे समय को झेलने को भी मनुष्‍य विवश होता है , परंपरागत ज्‍योतिषियों द्वारा इसके इलाज के लिए बडे बडे दावे किए जाते हैं । 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' इस बारे में एक अलग ही धारणा रखता है , इसपर मै लगभग 10 पोस्‍ट लिख चुकी हूं। कल पिताजी के द्वारा 15 वर्ष पूर्व हस्‍तलिखित कुंडली बनाई जाने वाली एक पुस्तिका मिली। इसमें उन्‍होने संक्षेप में बुरे समय के इलाज के निम्‍न विंदुओं को प्रकाशित करवाया था ....

  • बुरे समय में घबडाहट की बात न हो , समय बहुत तेज गति से बदलता है। 
  • समय से पूर्व अभिष्‍ट की प्राप्ति नहीं होती , समय का इंतजार करें। 
  • समय की वास्‍तविक जानकारी ही हर प्रकार के भ्रमों का उन्‍मूलन करती है। 
  • अच्‍छे बुरे समय की जानकारी सही समय में सही कदम उठाने को प्ररित करती है। 
  • बुरे दिनों में रिस्‍क न ले , गर्दिश के ग्रहों का यह सर्वोत्‍तम इलाज है। 
  • रत्‍न धारण , पूजा पाठ , तंत्र मंत्र या किसी प्रकार के अनुष्‍ठान से अच्‍छा समय के अनुसार सूझ बूझ और धैर्य से किया गया काम होता है। 
  • बुरे समय का अभिप्राय निष्क्रियता नहीं , वरन् परिस्थितियों से समझौता है , अतिरिक्‍त रिस्‍क की अवहेलना करें। 
  • अनुशासित रहे , गुरूजनों की इज्‍जत एवं दलितों की सहायता करें। 
  • नेष्‍ट ग्रह जब गोचर में सबसे अधिक गति‍शीलता को प्राप्‍त करे , तो अपने लग्‍नकाल में सोना , चांदी या ताम्‍बे को पूर्ण तौर पर गलाकर नया रूप देकर उसे धारण करें।

23 टिप्‍पणियां:

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बुरे ग्रहों के इलाज के लिए काफी उपयोगी जानकारी है और इस बाबत काफी कुछ जानने का मौका मिला . . ... आभार

माधव ने कहा…

बढ़िया जानकारी दी आपने

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

जीवन शैली के उत्तम विचार है, बस एक जगह अटक गया ; दलित नहीं गरीब कहिये , दलित तो आजकल मोटे-मोटे सेठ हो गए है !

ललित शर्मा ने कहा…

मतलब बुरे समय में कछुए की भांति खतरा भांप कर चलें। अनुशासन का पालन करें।
बहुत ही सार्थक सलाह दी संगीता जी आपने।
शुभकामनाएं।

निर्मला कपिला ने कहा…

रत्‍न धारण , पूजा पाठ , तंत्र मंत्र या किसी प्रकार के अनुष्‍ठान से अच्‍छा समय के अनुसार सूझ बूझ और धैर्य से किया गया काम होता है।
संगीता जी इस बात से ही नही पूरी बातों से सहमत हूँ। धन्यवाद। उपयोगी जानकारी है।

Gourav Agrawal ने कहा…

हाँ..... सही लगे ये " लाइफ के फंडे भी " ध्यान रखेंगे सभी :)

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

अच्छी जानकारी मिली ...

डॉ टी एस दराल ने कहा…

बहुत उपयोगी बातें बताई हैं संगीता जी । आभार ।

वाणी गीत ने कहा…

उपयोगी जानकारी ..!

कुमार राधारमण ने कहा…

कई लोगों के जीवन का सर्वोत्तम समय जन्म से पूर्व ही बीत चुका होता है। ऐसे लोगों का क्या होगा?

Vijai Mathur ने कहा…

Ek tippnikar ka kahna hai kisi ka Achcha samay janam ke purv bite to kya?
Jis prkar Dhoop aur Varsha se bachav men chaata lagate hain usi prakar bure grahon ki Shanti karain-Yadi upai Vaigyanik hoga to labh bhi tatkal hoga.Bhatka hua upai karengey to nishphal rahega.

Babli ने कहा…

आपकी टिपण्णी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया!
बहुत बढ़िया और महत्वपूर्ण जानकारी मिली! आभार!

Akanksha~आकांक्षा ने कहा…

बड़ी उपयोगी जानकारी मिली...आभार. कभी 'शब्द-शिखर' पर भी पधारें.

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

'नेष्‍ट ग्रह जब गोचर में सबसे अधिक गति‍शीलता को प्राप्‍त करे , तो अपने लग्‍नकाल में सोना , चांदी या ताम्‍बे को पूर्ण तौर पर गलाकर नया रूप देकर उसे धारण करें।'

संगीता जी, क्या आप भी विध्ननाश्क यंत्र का व्यापार शुरू करने जा रही हैं? :)

वीना ने कहा…

अच्छी जानकारी है...

shikha varshney ने कहा…

अच्छी और व्यावहारिक जानकारी है ."दलित ..मुझे भी अखरा :)

वन्दना ने कहा…

बेहद उपयोगी जानकारी उपलब्ध करवाई है……………आभार्।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

सबी सुझाव बहुत उपयोगी हैं!

डॉ महेश सिन्हा ने कहा…

"रत्‍न धारण , पूजा पाठ , तंत्र मंत्र या किसी प्रकार के अनुष्‍ठान से अच्‍छा समय के अनुसार सूझ बूझ और धैर्य से किया गया काम होता है। "
"नेष्‍ट ग्रह जब गोचर में सबसे अधिक गति‍शीलता को प्राप्‍त करे , तो अपने लग्‍नकाल में सोना , चांदी या ताम्‍बे को पूर्ण तौर पर गलाकर नया रूप देकर उसे धारण करें।"

उपरोक्त दो बिन्दुओं की विवेचना करने का कष्ट करें ॰

डॉ महेश सिन्हा ने कहा…

आपने अयोध्या के बारे में कुछ भविष्यवाणी की थी । अब बदली हुई तिथि में इस बारे में क्या विचार है आपका ।

Poorviya ने कहा…

aacchhi jankari hai.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

मुद्दा तो है की बुरे ग्रे हैं ये कैसे [पता चले ....

vinay ने कहा…

बहुत अच्छी बातें कहीं,आपके पिता जी ने ।