बुधवार, 1 मई 2013

29 अप्रैल को होने वाले विवाह के साथ अजब गजब कुछ समाचारों के लिंक ......( Astrology )

30 अप्रैल को सुबह सुबह शैलेश भारतवासी जी के फेसबुक स्‍टेटस पर मेरी नजर गई ...
क्या कभी ऐसा भी हो सकता है कि मातम और उत्सव इतनी जल्दी-जल्दी हों कि इंसान उनका एहसास न कर सके। गौरव शर्मा (Gaurav Sharma) के परिवार के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। 27 अप्रैल 2013 को गौरव का लग्न-महोत्सव था (झाँसी, आगरा, मथुरा आदि स्थानों का लग्न पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के तिलकोत्सव की तरह का ही एक वैवाहिक संस्कार है)। लड़की पक्ष वाले लग्न करके रात तीन बजे तक झाँसी से धौलपुर के लिए निकले। शायद वे धौलपुर पहुँच भी नहीं पाए होंगे कि लगभग सुबह के साढ़े सात बजे गौरव के पिताजी का दिल का दौरा पड़ने से देहांत हो गया। यह पहला ही दौरा था लेकिन जानलेवा साबित हुआ। 
इस घटना को लेकर मन कुछ दुखी ही था कि शाम को सुनील बडोला जी का फेसबुक स्‍टेटस भी वैसा ही देखने को मिल गया ....
मातम में बदली शादी, दूल्हे की मौत
देहरादून: अंबाला से पूरे परिवार और नाते-रिश्तेदारों के साथ सेहरा बांधकर देहरादून बरात लेकर पहुंचे दूल्हे की जयमाला के दौरान तबियत बिगड़ गई। परिजन उसे अस्पताल ले गए, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया। मृतक के परिजनों ने खाने में किसी तरह की विषाक्त चीज खिलाने की आशंका जताई है। पुलिस पीएम रिपोर्ट आने का इंतजार कर रही है। उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

30 वर्षों से ग्रहों के प्रभाव का अध्‍ययन करने के बाद यह तो स्‍पष्‍ट हुआ है कि ग्रहों का कोई योग सुखद वातावरण तैयार करता है तो कुछ कष्‍टकर , यही कारण है कि शुभ मुहूर्त्‍तों में विवाह या अन्‍य कर्मकांड करने को महत्‍व दिया जाता है। 29 अप्रैल को अक्षय तृतीया का दिन था , जिस दिन के लग्‍न को हमारे पंचांगों में बहुत ही शुभ माना गया है , फिर भी ऐसी दुर्घटनाएं क्‍यों हुई , आखि 29 अप््रैल को दिन अशुभ तो नहीं था , यह जानने के लिए मैने गूगल में '29 अप्रैल 2013' कीवर्ड के द्वारा पिछले सप्‍ताह के सभी समाचारों पर नजर डाली तो पाया कि बहुत सारे स्‍थानों में इस दिन के विवाह में कुछ न कुछ बाधाएं उपस्थित हुईं , ऐसा अन्‍य दिनों में भी होता होगा , क्‍योंकि मैने इस तरह का सर्च कभी नहीं किया था। पर यदि इसी बार इतने बडे स्‍तर पर वैवाहिक कार्यक्रम में गडबडी आई है तो यह मेरे लिए शोध का विषय है कि आखिर इस दिन ग्रहों की स्थिति में क्‍या गडबडी थी , ताकि ऐसे दिनों में आगे विवाह न किए जाने की सलाह लोगों को दी जा सके। ये देखिए 29 अप्रैल को होने वाले विवाह के साथ अजब गजब कुछ समाचारों के लिंक ......

2 टिप्‍पणियां:

rohitash kumar ने कहा…

संगीता जी कभी समझ नहीं पाता हूं कि ऐसा क्यों होता है। पहाड़ों से इस तरह की खबरें हमेशा आती हैं...फिर अक्षय तृतिया जैसे दिनों के बारे में तो मशहूर है कि इस दिन किसी तरह का मुहर्त का समय नहीं देखा जाता..पहाड़ों के बारे में तो समझता था कि चलो दुर्गम इलाके हैं..पर फिर ये समझ नहीं आता कि कुंडली का मिलान भी तो किया जाता है....क्या उससे इसका पता नहीं चलता....मुझे जो सबसे सटीक लगता है वो ये है कि किसी शुभ मुहर्ती में किसी खास या कई लोगो कि कुंडली में कोई मारक ग्रह होगा जो उनकी खुशी में खलल हर हाल में डालने की तैयारी में होगा..औऱ उस ग्रह को लोग नजरअंदाज कर देते होंगे औऱ कालांतर में इस तरह के ग्रह के प्रभाव को ने देखने की परंपरा सी बन गई होगी..

महेश कुमार वर्मा : Mahesh Kumar Verma ने कहा…

Sodh jaruri hai.....