रविवार, 30 अक्तूबर 2011

हैकरों के लिए ऐसे पासवर्डों का तोड निकालना कुछ कठिन होता है !!

इस वर्ष नवरात्र में दस बारह दिनों के लिए गांव चली गयी , चूंकि गांव में मेरे पास कंप्‍यूटर और इंटरनेट की सुविधा नहीं थी , इसलिए इतने दिनों तक अपने जीमेल को लॉगिन भी नहीं कर सकी। आने के बाद जैसे ही काम करना शुरू किया , एलर्ट आने शुरू हुए। मेरा अकाउंट 8 अक्‍तूबर को किसी दूसरे देश से खोला गया था। राहत की बात थी कि किसी को मेल वगैरह नहीं किया गया था। मैने झट से पासवर्ड बदला , पर बदलने के बाद भी मुझे कोई राहत नहीं मिली। 11 अक्‍तूबर को ब्राजील और 13 अक्‍तूबर को टर्की से पुन: इस अकाउंट को खोले जाने की सूचना मिली। इसके बाद मैने अपने पासवर्ड को बहुत मजबूत बनाया , उसमें कैपिटल , स्‍माल अक्षरों और अंकों के साथ संकेत चिन्‍हों का भी प्रयोग किया , यानि कि वैसा ही मजबूत पासवर्ड रखा , जैसा इंटरनेट बैंकिंग में रखने की सलाह दी जाती है ..


पासवर्ड को बदलने के बाद इतने दिन गुजर चुके हैं , अभी तक पुन: ऐसी कोई सूचना नहीं मिली है । शायद हैकरों के लिए ऐसे पासवर्डों का तोड निकालना शायद कुछ कठिन होता हो या फिर उन्‍हें अब मेरे अकाउंट को खोलने की आवश्‍यकता नहीं हो रही हो , पर मुझे तो राहत मिल गयी है। हालांकि ऐसे पासवर्डों को याद रखना लोगों के लिए भी कठिन होता है , पर मेरी सलाह है कि  इंटरनेट का अच्‍छी तरह उपयोग करनेवालों को ऐसी सावधानी बरतनी ही चाहिए , उन्‍हें ऐसे ही पासवर्ड रखने चाहिए , क्‍यूंकि अकाउंट का दुरूपयोग किए जाने के बाद कोई चारा नहीं होता।

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