मंगलवार, 16 दिसंबर 2008

ज्‍योतिष को विज्ञान सिद्ध करने के लिए और कितनी कोशिश करूं ? ( Astrology )

लगभग हर पोस्‍ट में मुझे पाठको की एक दो प्रतिक्रियाएं ऐसी अवश्‍य ही मिल जाती हैं कि वे ज्‍योतिष को विज्ञान नहीं मानते , इसलिए मेरे आलेख उनके लिए बकवास के सिवा कुछ नहीं। ज्‍योतिष या ज्‍योतिषियों का जो स्‍वरूप आज समाज में व्‍याप्‍त है , उसे देखते हुए उनका ऐसा कहना बिल्‍कुल स्‍वाभाविक है। किन्‍तु मेरा आग्रह है कि आप गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष पर आधारित मेरे आलेखों को ध्‍यान से पढकर इस विद्या के वैज्ञानिक स्‍वरूप को जानें पहचानें। आज 16 दिसम्‍बर है यानि , का बिल्‍कुल मध्‍य । इस समय के ठंड से बचने के लिए अबतक न जाने कितनी कोशिशें की जाती रही है , पर अभी के मौसम का हाल देखिए, अधिकतम और न्‍यूनतम दोनो में ही । क्‍या आपने पहले सोंचा था कि इस वर्ष ऐसा हो सकता है ? क्‍या मौसम विभाग की तरफ से भी ऐसी कोई सूचना मिली थी ? मेरे ख्‍याल से आपके पास इन दोनों प्रश्‍नों का जवाब ना में ही होगा। अब सोंचिए , सरकार की ओर से करोडों खर्च करने के बावजूद भी जिस मौसम के एक महीनें बाद की भविष्‍यवाणी मौसम वैज्ञानिकों द्वारा नहीं की जा सकी , उसे ग्रहों की स्थिति पर आधारित मात्र 50 या 100 रूपए के एक पंचांग के आधार पर हमने डेढ माह पूर्व ही कर लिया था। 25 दिसम्‍बर तक मौसम के असामान्‍य तौर पर ठंडे न होने की बात की भविष्‍यवाणी को 8 नवम्‍बर को प्रकाशित होनेवाले मेरे इस लेख में पढें।



इसी प्रकार मैने इस आलेख में 23 अक्‍तूबर की शाम को न सिर्फ 24 अक्‍तूबर को शेयर बाजार के सर्वाधिक गिरने की भविष्‍यवाणी ही , वरन सोमवार यानि 27 अक्‍तूबर से फिर से बाजार के सामान्‍य अवस्‍था में आने की भी भविष्‍यवाणी कर दी थी। इस भविष्‍यवाणी के सटीक होने पर ही मुझे कमल शर्मा जी के द्वारा उनकी वेबसाइट पर हर सप्‍ताह शेयर बाजार पर कालम लिखने का निमंत्रण भी मिला। सेंसेक्‍स की उतनी बुरी स्थिति में , जब सारे निवेशक हैरान परेशान थे , मैने मोल तोल पर प्रकाशित अपने कई लेखों में 20 दिसम्‍बर तक इसके सामान्‍य तौर पर बढने की ही भविष्‍यवाणी की और यदि तुलनात्मक ढंग से देखा जाय तो पुन: सेंसेक्‍स की वैसी बुरी हालत नहीं आयी। बिना किसी ठोस आधार के इतने आत्‍मविश्‍वास से कोई भविष्‍यवाणी नहीं की जा सकती है।



2 और 3 जनवरी 2009 को पुन: विभिन्‍न ग्रहों की जो स्थितियां बन रही हैं , वह मौसम को बहुत ही बडे रूप में प्रभावित करेगी , इस योग का प्रभाव इसके दो चार दिनों से एक सप्‍ताह पूर्व से ही शुरू होते देखा जा सकता है। इस योग के कारण निम्‍न बातें देखने को मिल सकती है.....


1. सारा आसमान बादलों से भरा रहेगा।
2. जगह जगह पर कुहरा बनना आरंभ होगा।
3. समुद्री भागों में तूफान आने की संभावना बनेगी।
4. पहाडी क्षेत्रों में बर्फ गिरने से मुश्किलें बढेंगी।
5. मैदानी भागों में तेज हवाएं चलेंगी।
6. बहुत सारे जगहों पर बेमौसम बरसात होने से ठंड का बढना स्‍वाभाविक होगा।
7. यह ठंड बढती हुई 21 जनवरी तक लोगों का जीना मुश्किल करेगी।
8. संभवत: इसी समय के आसपास पारा अपने न्‍यूनतम स्‍तर को स्‍पर्श करेगा।


सभी पाठकों से मेरा विनम्र अनुरोध है कि वे इस समय के मौसम पर गौर करें और ज्‍योतिष को विज्ञान समझने की कोशिश करें। आशा है , आप सबों का सहयोग मुझे अवश्‍य मिलेगा और मुझे लोगों के मन से यह भ्रम हटाने में सफलता मिलेगी कि ज्‍योतिष विज्ञान नहीं है।
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