लगभग हर पोस्ट में मुझे पाठको की एक दो प्रतिक्रियाएं ऐसी अवश्य ही मिल जाती हैं कि वे ज्योतिष को विज्ञान नहीं मानते , इसलिए मेरे आलेख उनके लिए बकवास के सिवा कुछ नहीं। ज्योतिष या ज्योतिषियों का जो स्वरूप आज समाज में व्याप्त है , उसे देखते हुए उनका ऐसा कहना बिल्कुल स्वाभाविक है। किन्तु मेरा आग्रह है कि आप गत्यात्मक ज्योतिष पर आधारित मेरे आलेखों को ध्यान से पढकर इस विद्या के वैज्ञानिक स्वरूप को जानें पहचानें। आज 16 दिसम्बर है यानि , का बिल्कुल मध्य । इस समय के ठंड से बचने के लिए अबतक न जाने कितनी कोशिशें की जाती रही है , पर अभी के मौसम का हाल देखिए, अधिकतम और न्यूनतम दोनो में ही । क्या आपने पहले सोंचा था कि इस वर्ष ऐसा हो सकता है ? क्या मौसम विभाग की तरफ से भी ऐसी कोई सूचना मिली थी ? मेरे ख्याल से आपके पास इन दोनों प्रश्नों का जवाब ना में ही होगा। अब सोंचिए , सरकार की ओर से करोडों खर्च करने के बावजूद भी जिस मौसम के एक महीनें बाद की भविष्यवाणी मौसम वैज्ञानिकों द्वारा नहीं की जा सकी , उसे ग्रहों की स्थिति पर आधारित मात्र 50 या 100 रूपए के एक पंचांग के आधार पर हमने डेढ माह पूर्व ही कर लिया था। 25 दिसम्बर तक मौसम के असामान्य तौर पर ठंडे न होने की बात की भविष्यवाणी को 8 नवम्बर को प्रकाशित होनेवाले मेरे इस लेख में पढें।
इसी प्रकार मैने इस आलेख में 23 अक्तूबर की शाम को न सिर्फ 24 अक्तूबर को शेयर बाजार के सर्वाधिक गिरने की भविष्यवाणी ही , वरन सोमवार यानि 27 अक्तूबर से फिर से बाजार के सामान्य अवस्था में आने की भी भविष्यवाणी कर दी थी। इस भविष्यवाणी के सटीक होने पर ही मुझे कमल शर्मा जी के द्वारा उनकी वेबसाइट पर हर सप्ताह शेयर बाजार पर कालम लिखने का निमंत्रण भी मिला। सेंसेक्स की उतनी बुरी स्थिति में , जब सारे निवेशक हैरान परेशान थे , मैने मोल तोल पर प्रकाशित अपने कई लेखों में 20 दिसम्बर तक इसके सामान्य तौर पर बढने की ही भविष्यवाणी की और यदि तुलनात्मक ढंग से देखा जाय तो पुन: सेंसेक्स की वैसी बुरी हालत नहीं आयी। बिना किसी ठोस आधार के इतने आत्मविश्वास से कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है।
2 और 3 जनवरी 2009 को पुन: विभिन्न ग्रहों की जो स्थितियां बन रही हैं , वह मौसम को बहुत ही बडे रूप में प्रभावित करेगी , इस योग का प्रभाव इसके दो चार दिनों से एक सप्ताह पूर्व से ही शुरू होते देखा जा सकता है। इस योग के कारण निम्न बातें देखने को मिल सकती है.....
1. सारा आसमान बादलों से भरा रहेगा।
2. जगह जगह पर कुहरा बनना आरंभ होगा।
3. समुद्री भागों में तूफान आने की संभावना बनेगी।
4. पहाडी क्षेत्रों में बर्फ गिरने से मुश्किलें बढेंगी।
5. मैदानी भागों में तेज हवाएं चलेंगी।
6. बहुत सारे जगहों पर बेमौसम बरसात होने से ठंड का बढना स्वाभाविक होगा।
7. यह ठंड बढती हुई 21 जनवरी तक लोगों का जीना मुश्किल करेगी।
8. संभवत: इसी समय के आसपास पारा अपने न्यूनतम स्तर को स्पर्श करेगा।
सभी पाठकों से मेरा विनम्र अनुरोध है कि वे इस समय के मौसम पर गौर करें और ज्योतिष को विज्ञान समझने की कोशिश करें। आशा है , आप सबों का सहयोग मुझे अवश्य मिलेगा और मुझे लोगों के मन से यह भ्रम हटाने में सफलता मिलेगी कि ज्योतिष विज्ञान नहीं है।
इसी प्रकार मैने इस आलेख में 23 अक्तूबर की शाम को न सिर्फ 24 अक्तूबर को शेयर बाजार के सर्वाधिक गिरने की भविष्यवाणी ही , वरन सोमवार यानि 27 अक्तूबर से फिर से बाजार के सामान्य अवस्था में आने की भी भविष्यवाणी कर दी थी। इस भविष्यवाणी के सटीक होने पर ही मुझे कमल शर्मा जी के द्वारा उनकी वेबसाइट पर हर सप्ताह शेयर बाजार पर कालम लिखने का निमंत्रण भी मिला। सेंसेक्स की उतनी बुरी स्थिति में , जब सारे निवेशक हैरान परेशान थे , मैने मोल तोल पर प्रकाशित अपने कई लेखों में 20 दिसम्बर तक इसके सामान्य तौर पर बढने की ही भविष्यवाणी की और यदि तुलनात्मक ढंग से देखा जाय तो पुन: सेंसेक्स की वैसी बुरी हालत नहीं आयी। बिना किसी ठोस आधार के इतने आत्मविश्वास से कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है।
2 और 3 जनवरी 2009 को पुन: विभिन्न ग्रहों की जो स्थितियां बन रही हैं , वह मौसम को बहुत ही बडे रूप में प्रभावित करेगी , इस योग का प्रभाव इसके दो चार दिनों से एक सप्ताह पूर्व से ही शुरू होते देखा जा सकता है। इस योग के कारण निम्न बातें देखने को मिल सकती है.....
1. सारा आसमान बादलों से भरा रहेगा।
2. जगह जगह पर कुहरा बनना आरंभ होगा।
3. समुद्री भागों में तूफान आने की संभावना बनेगी।
4. पहाडी क्षेत्रों में बर्फ गिरने से मुश्किलें बढेंगी।
5. मैदानी भागों में तेज हवाएं चलेंगी।
6. बहुत सारे जगहों पर बेमौसम बरसात होने से ठंड का बढना स्वाभाविक होगा।
7. यह ठंड बढती हुई 21 जनवरी तक लोगों का जीना मुश्किल करेगी।
8. संभवत: इसी समय के आसपास पारा अपने न्यूनतम स्तर को स्पर्श करेगा।
सभी पाठकों से मेरा विनम्र अनुरोध है कि वे इस समय के मौसम पर गौर करें और ज्योतिष को विज्ञान समझने की कोशिश करें। आशा है , आप सबों का सहयोग मुझे अवश्य मिलेगा और मुझे लोगों के मन से यह भ्रम हटाने में सफलता मिलेगी कि ज्योतिष विज्ञान नहीं है।
25 टिप्पणियां:
kyaa aapko mumbai ki ghatnayo ka pata tha?
ek birahman ne kaha hai, jyotish saccha hai
dil ko bahlane ka ghalib ye khayal accha hai
चम्तकार के बाद अविष्कार की गणना भी अवश्य बताएं और ऐसा कोई भविष्यवाणी ना करे जिससे देश में अंधविश्वास बढेा
ज्योतिष शास्त्र का सबसे बडा आधार यह है कि पृथ्वी स्थिर है -संगीता जी आपने यह उद्धृत किया है .मगर यह तो ग़लत है ,आज दुनिया जानती है कि धरती स्थिर नही अपने पथ पर भी घूमती है और सूर्य का भी चक्र लगाती है .एक ग़लतफहमी और है शायद इस समय तो सूर्य धरती के नजदीक है -सूर्य जाडे में धरती के नजदीक होता है और गरमी में दूर -हां धरती पर जाडे और गरमी का मौसम धरती के अपने अक्ष पर थोडा झुके होने के कारण है -आपने वार्मेर विंटर्स और कोल्डर समर की कहावते नहीं सुनी जो पश्चिमी दुनिया के लिए एक आम बात है !
ज्योतिष शास्त्र को पूरी तरह मानती हूं या नहीं कह नहीं सकती। पर ज्योतिष विज्ञान पढ़ना बहुत अच्छा लगता है। मैं आपके ब्लाग पर बराबर आती रहुंगी।और इस विधा को समझने की कोशिश करूंगी।
पहाड़ो में जनवरी में बर्फ गिरेगी...हम्म वाकई काफी वैज्ञानिक
है ये ज्योतिष तो। :))
मेरा तो कहना है कि आपकी हर पोस्ट पर ऐसी और टिप्पणियां आयें, इससे आप और अच्छा काम करने के लिये संकल्पित होंगी। जैसे-जैसे सत्य सामने आता जायेगा, वैसे-वैसे भ्रम दूर होते चले जायेंगे।
दुख सिर्फ इस बात पर होता है कि अपने ही ग्रन्थों और ज्ञान पर, अपने ही लोग तब तक विश्वास नहीं करते जब तक उस पर पश्चिम की मोहर ना लग जाये।
यह लगाता है कि थोड़ा करीब से देखना होगा। अच्छा किया, आपने कुछ जिज्ञासा बना दी।
हमारी समझ में ज्योतिष् ग्रह नक्षत्रों की स्थितियों का आंकलन है जो निश्चित ही वैज्ञानिक है अब रहा उनके प्रभाव का मूल्यांकन, जो संभवतः इस बात पर आधारित है कि इस विद्या के धारक ने कितना अध्ययन किया है.
सिद्ध करने की कोशिश न करिए, जानने की कोशिश करिए कि ऐसा वास्तव में है या नहीं।
हाथ कंगन को आरसी क्या ...? आपकी भविष्य वाणियों की हकीकत खुद ब खुद सब बता देगी । सभी लोग ना तो एक राह चल सकते हैं और ना ही ऎसी उम्मीद पालना चाहिए । जो यकीन करे उसका भला ,जो ना करे उसका भी भला ...।
ज्योतिष अंधविश्वसिओं की वजह से विज्ञान नही माना जाता . लेकिन यह विज्ञान नही तो विज्ञान से कम भी नही .
बेनामी जी , जीतेन्द्र जी , अरविंद जी ,प्रातिमा वत्स जी , मसीजीवी जी ,अलग सा जी , ज्ञानदत्त जी ,सुब्रमनियन जी , आलोक जी , सरिता जी , धीरू सिंह जी , हमारे ब्लाग में आने , हमारे आलेख को पढने और टिप्पणियां देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।
आप इसे विज्ञान क्यूँ बता रहीं हैं? विज्ञान ख़ुद हर साल अपनी परिभाषा बदलता है...कहा तक पीछा कीजियेगा?
लोग तबतक इसे नही समझेंगे जबतक ख़ुद महसूस नही करेंगे,, मैंने देखा है इसलिए यकीन करता हूँ|
धर्म विज्ञान तो नही है| विज्ञान ने भगवान् को कब माना? लेकिन हर रोज हम भगवान् भगवान् करते रहते हैं|
ये भरोसे की बात है, भरोषा है तो है नही है तो नही|
संगीता जी मुझे आप के सारे लेख पढने का शोंक है, ओर मै पढता भी हुं, लेकिन मेरे मन मै शुरु से ही कॊई जिग्याषा नही हुयी अपना भाविष्या जानाने की, कयोकि जो होना है उसे टाला नही जा सकता, फ़िर समय से पहले ही चिंता क्यु पाल ले.
लेकिन पढना चाहिये , लेकिन मै िरोध भी नही करता.
धन्यवाद
कहाँ की बात कर रही हैं आप? कौन से स्थान की? हमारे यहाँ क्या होगा, कनाडा में? आपके लेख से कुछ स्पष्ट नहीं है।
ज्योतिष हमने भी की है। अन्यथा न लें मगर सबसे पहले हमें code of conduct में सिखाया गया था कि ऐसी कोई बात न कही जाये जिससे जातक/समाज के मन में डर बैठ जाये। आपके पिछले पोस्ट में यही बात देखने को मिली थी।
विश्वास-अविश्वास ज्योतिष पर नहीं ज्योतिषी पर होता है। मैं अष्टक्वर्ग का इस्तेमाल करती हूँ। आप कुछ लेख मेरे ब्लाग पर चाहें तो पढ़ सकती हैं।
संगीता जी,मैं ज्योतिष को विज्ञानं मानती हूँ .जब से मद्रास का नाडी शास्त्र जाना है और अपना 'पत्ता 'पढ़वाया है तब
से और विश्वास हो गया है कि ज्योतिष एक विज्ञानं है.सब calculations का खेल है.
नहीं तो ५००० साल पहले हिंदू ज्योतिषाचार्यों द्वारा लिखी बात आज कैसे सच हो रही हैं????
खैर..फिर भी मैं मानती हूँ कि अगर 'दोषों' को पूजा से ठीक किया जा सकता है तो अपने कर्मों से भी अपनी तकदीर बदल सकते हैं..आप के लेख पढ़ रहे हैं पसंद किए हैं और आप की उपस्थिति यहाँ अच्छी लगती है.
सब कुछ निर्भर करता है व्यक्ति की परिस्थिती पर। अगर समय अच्छा है तो ज्योतिष क्या भाग्य और भगवान भी कल्पना है और समय खराब है तो हर मंदिर,हर मज़ार हर बाबा और हर ज्योतिष ठीक है। ऐसा मेरा मानना है,ज़रुरी नही सभी इससे सहमत हो,और जो ना हो वे अपनी राय बनाने के लिये स्वतत्र है।
क्षमा करें ज्योतिष को विज्ञान नहीं मान सकता. मगर यह मेरे व्यक्तिगत विचार है. आप अपना कार्य जारी रखें.
P.N.SUBBRAMANIAN साहब ने बिल्कुल सही कहा है.
राजीव महेश्वरी
मैं ज्योतिष शास्त्र को जैसा आप मानती हैं उससे पूर्णतः सहमत हूं
संगीता जी नमस्कार
पहली शिकायत आपसे कि ऐसे लोगों की टिप्पणी से दुखी हो रही हैं जिन्हें इस विषय की जानकारी ही नहीं है। किसी ने भगवान को देखा नहीं और कोई उसे मानता नहीं है। इससे उसकी उपस्थिति या अस्तित्व संकट में तो नहीं पड़ जाता। आप ज्योतिष शास्त्र की अच्छी सेवा कर रही हैं और हमें भी लाभकारी जानकारियां दे रही हैं। आप नियमित लिखती रहेंगी तो हम जैसे कुछ और विद्यार्थियों का मनोबल ऊंचा रहेगा।
इसके साथ ही एक सलाह देना चाहूंगा कि ज्योतिष को विज्ञान की कसौटी पर कसने की बजाय इसमें शोध की संभावनाओं पर ही अधिक ध्यान दिया जाए तो अच्छा होगा। लोग भेड़चाल से चलते हैं। आज विज्ञान का बोलबाला है तो हर चीज विज्ञान है। पश्चिम का ही एक दौर ऐसा था जो पोप और धर्म से विज्ञान को चलाता था। इसलिए मानव द्वारा बनाई गई कसौटियों पर इस विद्या को कसना अपने आप में कोटि दोष है।
आपने पहले भी ठोस जानकारियां दी हैं और आगे भी आपसे यही उम्मीद करते हैं। आप जारी रखें बहुत से लोग आपको देख, पढ और समझ रहे हैं।
शुभकामनाओं के साथ...
इस ब्रह्माण्ड में क्या घूम रहा है और क्या स्थिर है यह तो मेरे विचार से कोई निश्चित नहीं कह सकता . जब इसका कुछ ओर छोर ही नहीं मालूम तो कैसे कहें कि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूम रही है . कोई स्वयंसिद्ध स्थिर बिन्दु तो उपल्ब्ध है नहीं जिसके सापेक्ष पृथ्वी या सूर्य का घूमना या न घूमना निर्धारित किया जा सके . हम सामान्यत: सूर्य को स्थिर मान कर चलते हैं पर स्थिर तो आकाश गंगा को भी नही कह सकते . गति तो सापेक्षता से ही सिद्ध होती है .
मानो तो मैं गंगा मां हूं ना मानो तो बहता पानी
ज्योतिष के अनुमान ठीक सिद्ध होते हैं बशर्ते ज्योतिषी समझदार हो
हमें आप पर यकीन है
आपके प्रोत्साहन के लिये हार्दिक आभार। आगे भी इसी तरह के शोधपरक लेख आपको और देखने के लिये मिलेगें। आपका ब्लॉग का भी मेरे लिए अध्य्यन और रूचि का विषय है, जिसके परिणाम आपको जल्द ही देखने को मिलेगें।
Sangeeta Ji .farz kijiye ki aaj kuchh aisa ho jaye ki duniya ulat pulat ho jaye...sara vigyan..sare vaigyanik.... sab kuchh naye sire se shuru karana ho..! kya hoga fir??? log vishvas kare.nge ki is yug me koi aisi chhej thi jispe sandesh likhte hi sari duniya me ek dibbe ke upar dekha jaa sakta tha...??? ek chhoti si dibiya me bolo to sansaar ke doosare chhor se bhi baat ho sakti thi. kahi.n door baithe ek yantra ki button daba kar pralay laya jaa sakta tha. ....??? nahi sab kapol kalpit bate.n lage.ngi. jhooth ka pulinda..!!!!
aisa hi hai kuchh...gyan ke abahav me aisa hona natural hai. aap agyani samajh kar dhyaan na de.n. ham jaise jigyasuo.n ko bataye.n ki ham ise kaise seekhe.n.
badhai yogya kaam hai... itane virodho ke bavajood dati rahana
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